लोरी निश्चल प्रेम का पर्याय है

लोरी निश्चल प्रेम का पर्याय है 
निंदिया रानी आरे आजा,
लोरी तुम्हारे लिए अंतरंग में मेरे सजा
चंपा,चमेली,गुलाब सजते हैं बाग में,
तुम्हारी किलकारी बहुत प्यारी हमारे गुलशन में...
मैने तो सिर्फ लोरी गुनगुनाया है,
तेरी मुस्कुराहट ने उसे लय में पिरोया है 
मेरे प्रेम को तू कितना समझ रहा है, नन्ही उंगलियों से स्पर्श करा कुछ कह रहा है..
क्या कहूं तू है कितना प्यारा,
सबका है तू नन्हा राजदुलारा,
हृदय बहुत विचलित होता है,
तू जब भी रोता है..
बांहों में जब तुझे लेती हूं,
असीम आनंद से मुस्कुराती हूं..
तेरे होठों पे हमेशा मुस्कान सजती रहे,
दीर्घायु,यशस्वी का आशीष हम देते रहें...
वक्त को तू सुनहरा हमारे करने आया है,
देखो तो "कृष"कृष्ण बनकर हमारे घर आया है...

✍️उमा पुपुन
     रांची,  झारखंड

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