डॉ दयाराम विश्वकर्मा.. एक परिचय
वंश श्रेष्ठतम विश्वकर्मा में, दयाराम श्रीमान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
जन्म हुआ चंदौली जनपद, गंज शहाब सुगाँव।
खेत और खलिहान बीच, ठंडी बरगद की छाँव।
देहाती परिवेश किंतु मन में, था जोश जवान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
लल्लो देवी की गोदी में, मुराहू शर्मा गेह।
माता पिता सदा करते थे, अपने शिशु से नेह।
बचपन से तेजस्वी प्रतिभा, घर बाहर की शान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
बी एस सी एम ए पी एच डी, एम एड शिक्षा प्राप्त।
सृजनात्मक गतिविधि पारंगत, कला क्षेत्र में ख्यात।
करते हैं साहित्य साधना, अंतर्मन संज्ञान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
कवि लेखक वक्ता संपादक, श्रेष्ठ प्रशिक्षक सार।
रेडियो स्टेशन से नियमित, प्रसरित नए विचार।
प्रखर वक्तृता सुमधुर वाणी, बनी मुख्य पहचान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
शांत धीर गंभीर प्रकृति के, स्वामी श्री दयाराम।
धनी लेखनी वृहद विवेचन, संप्रेषण उद्याम।
जिला विकास अधिकारी बनकर, जन सेवा प्रण ठान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
दक्ष प्रशासन कार्य योग्यतम, जन सेवा निर्बाध।
नगर ग्राम दोनों विकास हित, सारे साधन साध।
ग्रामीणों के लिए पूज्य थे, ज्यों उनके भगवान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
मिला बहुत सम्मान क्षेत्र में, नौकरी या साहित्य।
कुशल संगठक नीति नियामक, वाणी मन लालित्य।
सीमित साधन से कर देते, मन की तेज़ उड़ान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
हो सेवा निवृत्त सर्विस से, सुंदरपुर आवास।
सामाजिक सांस्कृतिक कार्य में, रुचि लेते अब खास।
अभिप्रेरण कार्यों से करते, अब समाज उत्थान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
राज्य कर्मचारी संस्था से, मिला बड़ा सम्मान।
मिले प्रशस्ति पत्र अनगिन पर, ज़रा नहीं अभिमान।
समाचार पत्रों में लिखकर, बना रहे प्रतिमान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
लेख और कविताएं छपतीं, पाठक भाव विभोर।
जीवन पूर्ण समर्पित अब तो, जन सेवा की ओर।
भाव प्रसून सदैव विकासित, महका मन उद्यान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
चिरजीवी हों यही कामना, कभी घटे नहिं शक्ति।
जनता की सेवा में निश दिन, लगी रहे अनुरक्ति।
आजीवन संकल्पित दृढ़तर, हो कर्त्तव्य महान।
मिला दीन की कुटिया को यह, हीरा रत्न सुजान।।
रचनाकार : डॉ फूलचंद्र विश्वकर्मा सौरभ'
अंबेडकर नगर