पद्मश्री सम्मान और डॉ. सत्य प्रकाश

पद्मश्री सम्मान और डॉ. सत्य प्रकाश 
बीएचयू- वाराणसी : 
 पद्मश्री लाल जी सिंह पूर्व कुलपति काशी हिंदू विश्वविद्यालय एक वैज्ञानिक रहे। उनके डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के काम के ऊपर और उनकी विश्व में बनी हुई पहचान को देखते हुए भारत सरकार की तरफ से उनको पद्मश्री का सम्मान दिया गया था। जीवन के अंतिम वर्षों में पदम श्री लाल जी सिंह काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर के रूप में भी नियुक्त किए गए। पद्मश्री लाल जी सिंह के द्वारा काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कुलपति के दायित्व के रूप में काम करने के दौरान कुछ काम ऐसे हुए जो वैज्ञानिक डॉक्टर सत्य प्रकाश को बहुत ही प्रभावित किये और उन्होंने उच्च कोटि के नेशनल इंटरेस्ट के कामों को ट्रांसलेशनल रिसर्च के रूप में समाज के विभिन्न बुराइयों को दूर करने के लिए और मानवीय विकारों को सच्चे अर्थों में समाज से कम करने के लिए कुछ ऐसे इंटरवेंशन पर काम करना शुरू किया जो आगे चलकर बहुत बड़े सामाजिक शोध के रूप में भी माने जा रहे है। 2012 से 17 के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ही और आसपास की  टीम को लेकर डॉक्टर सत्य प्रकाश का प्रयास "विभिन्न मानसिक रोगों की रोकथाम और उसके लिए वार्तालाप के महत्व " पर बहुत अच्छा काम हुआ। 

 वार्तालाप के दौरान विभिन्न प्रकार के रोगों का परिचय और काउंसलिंग के माध्यम से वार्तालाप के माध्यम से कुछ-कुछ टॉपिक पर लेखन इत्यादि को प्रयोग के तौर पर व्यक्ति को लगाए रखना -एक साधारण सी लगने वाली प्रक्रिया से इलाज होना एक कल्पना थी ।
 धीरे-धीरे चलकर मानसिक विकृतियों को दूर करने में इस तरह के इंटरवेंशन को डॉक्टर सत्य प्रकाश ने शिक्षा और साहित्य समाज के बड़े लोगों के साथ मिलकर भारतवर्ष के हजारों लोगों पर इसका प्रयोग किया।  पुस्तक "फिर फिर सुनोगे " को मानव विकार अवसाद विमुक्ति साधन के रूप में भी देखा जा रहा है जिसमें भारत के मूर्धन्य विद्वानों के द्वारा कुछ ऐसे साहित्य को समाज को दिया गया है जिससे बहुत सुखद माना जा रहा है।

डॉ. सत्य प्रकाश जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति होने के कारण सामान्य आदमी की मनोदशा और संभावित कठिनाइयों को समझते हुए ही किसी भी समस्या में उस व्यक्ति को कोई नया सूत्र देकर आगे के लिए इंटरवेंशन को बेहतर बताते हैं।

अगर यह काम उनका अच्छा चलता रह जाये और BHU उनको और बेहतर काम करने का मौका दे तो पद्मश्री लाल जी सिंह के द्वारा दिया गया मार्गदर्शन डॉक्टर सत्य प्रकाश को भी एक दिन नई पहचान देने में सफलता दिलाएगा और हो सकता है कि भारत सरकार उन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए भी कभी चुन ले।

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