यदि व्यस्तता हो तो करें, केवल 05 मिनट की वैज्ञानिक पूजा
डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा
पूजा, निरुक्त या व्युत्पत्ति विज्ञान के अनुसार एक प्रकार का अनुष्ठान होता है;जो सभी जातियों, धर्मों, सम्प्रदायों में संपन्न किया जाता है। पूजा की उत्पत्ति “पूज”शब्द से हुई है- जिसका अर्थ सेवा करना या साथ लाना होता है।पूजा पूजक और पूज्य के बीच एक प्रगाढ़ सम्बन्ध स्थापित करता है,जिससे उपासक और देवी देवताओं के मध्य एक अन्तरंग,शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक लौकिक और प्रतीकात्मक भाव उत्पन्न होता है।
शिव पुराण के अनुसार पूजा शब्द दो संस्कृत शब्दों पुह और जयते शब्द से मिलकर बना है।पुह का अर्थ भोग के फल की प्राप्ति और जयते का मतलब कुछ पैदा होना से लगाया जाता है।यह धार्मिक कृत्य मनोकामनाओं को पूर्ण करने,भौतिक सुख की प्राप्ति और देवी देवताओं के समक्ष समर्पण दिखाने हेतु किया जाता है,जो उनके प्रति प्रेम विश्वास और श्रद्धा को प्रदर्शित करता है।पूजा समृद्धि, संपन्नता,आशीर्वाद,कल्याण,वरदान आदि के लिए किया जाता है।
मित्रों!आज के इस भाग दौड़ की ज़िन्दगी में,कई लोग घंटों पूजा में अपना समय नष्ट नहीं करना चाहते,तो उन्हें केवल पाँच मिनट का समय निकालकर वैज्ञानिक पूजा ही संपन्न करने से उन्हें वही लाभ प्राप्त होगा,जो घंटों की पूजा के बाद मिलता है।कारण भगवान भाव के भूखे होते हैं।उन्हें हमारे प्रसाद फल फूल और पैसों से कोई लेना नहीं होता।
कहते भी हैं-भावो हि विद्यते देवः अर्थात् भाव में ही देवता विद्यमान होते हैं।
अब आइए समझें कि पूजा के पीछे कौन सा वैज्ञानिक कारण होता है।पहला ध्वनि विज्ञान-मंत्रों के जाप से वाइब्रेशन उत्पन्न होता है,जिससे मन शांत होता है।मंत्रों के रिपीशन से मस्तिष्क में अल्फा और थीटा वेव्स बढ़ती हैं; जिससे 40%तक तनाव में कमी आती है।ॐ के उच्चारण से 432 हर्ट्ज़ की वाइब्रेशन उत्पन्न होती है।वातावरण शुद्धि का विज्ञान- जब हम कपूर जलाते हैं और यज्ञ हवन करते हैं,तो वातावरण शुद्ध होता है,और सूक्ष्म बैक्टीरिया का सफाया होता है।पूजा के दौरान जब हम प्रार्थना समर्पण और ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं,तो मनोविज्ञान कहता है कि इससे भटकाव, तनाव,नकारात्मकता और संज्ञानात्मक पुनर्निर्माण होता है, जिसे आसान भाषा में कहा जाता है कि सोच का दायरा बदलता है।टालमटोल करने की आदत ख़त्म होने लगती है।जीवन में सकारात्मकता आने लगती है।इसे मनोविज्ञान में संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा(सीबीटी)कहतेहैं।बयोरीदम का कॉन्सेप्ट-सुबह 4-6 बजे के बीच वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने के कारण,मन शांत रहता है।उस वक्त पूजा करने से शरीर दिनभर ऊर्जावान और फोकस्ड बना रहता है।न्यूरो साइंस यह सिद्ध कर चुका है कि यदि हम नियमित 05 मिनट भी पूजा 21 दिन तक लगातार करते हैं,तो दिमाग में एक न्यूरल पाथ वे बन जाता है और वह आदत में बदल जाता है।पूजा करने से जीवन अनुशासित होने लगता है।यही पूजा के पीछे का विज्ञान है;अतः हमें पूजा अवश्य करनी चाहिए।
अब आइये! वैज्ञानिक पूजा पर ध्यान दें।वैज्ञानिक पूजा किसी प्रकार के बाह्याडंबर और अंधविश्वास को नहीं मानता कि हम फल मीठा पैसा भगवान को अर्पित करेंगे तो भगवान खुश होंगे,क्योंकि भगवान आप के भाव के भूखे हैं। वह जो सर्वशक्तिमान है,जो सभी का पालन पोषण करता है,उसे आप के पैसे से तमाम सामग्री तामझाम से क्या मतलब?वह केवल आप के शुद्ध अंतःकरण को पहचानता है।आचार्य तुलसी ने भी रामचरित मानस में लिखा है-
निर्मल मन जन सो मोहि पावा।मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। अर्थ आप समझ ही गए होंगे।
हाँ तो बात हो रही है 05 मिनट के वैज्ञानिक पूजा की तो इसमें पहला स्टेप जो 30 सेकंड का, जो गहरी श्वास लेते हैं और अपने उपर जल छिड़कते हैं,जिससे दिमाग़ में सिग्नल जाता है और अधिक दिमाग पूजा के लिए तैयार होता है इसका मतलब शुद्धि से भी है कि हम तन मन से शुद्ध होवें।दूसरा स्टेप 02 मिनट का अपने इष्ट देव के मंत्र का 27 बार जाप।इससे फोकस बढ़ता है।दिमाग भटकाव से दूर होता है।तीसरा चरण 1.5 मिनट का,एकाग्रता व शांति के लिए हम ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं कि वह हमे सक्षम बनाया कुछ करने के लिए,इसमे हम उस परम पिता को अपने परिवार,स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए धन्यवाद देते हैं जब हम ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं,तो हमारे दिमाग में डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन रिलीज़ होता है,जिससे पूजक को भक्त को ख़ुशी मिलती है।चौथा स्टेप 1 मिनट का,उस परम सत्ता के समक्ष सात्विक संकल्प करने का होता है और उस दौरान पूजक सभी का भला करने,चोरी न करने, झूठ न बोलने,सत्य का आचरण करने का संकल्प करता है जिससे उसमें आत्म विश्वास बढ़ता है उसकी उम्र बढ़ती है और उसे एक दिशा मिलती है।यही 05 मिनट की वैज्ञानिक पूजा की प्रक्रिया है जिसे आप हम सभी अपनाकर भी उस परम पिता के क़रीब जा सकते हैं।पूजा से जो लाभ मिलता है अब उसका भी संक्षिप्त विवेचन यहाँ आवश्यक है। तो आइए देखें कि पूजा पाठ से क्या क्या लाभ होता है।चिकित्सा विज्ञान में इस पर लगभग 500 से कहीं ज़्यादा शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं जिसमें फ़िडेल्फ़िया और पेल्सेवेनिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर एंड्रू न्यू वर्ग और डॉक्टर यच जी क्यू का शोध अति महत्वपूर्ण है।जिसमें इन दोनों ने एक साइको न्यूरो सॉफ़्टवेयर बनाया है।जिसमें बच्चों नौजवानों और 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को शामिल करते हुए शोध किया गया तथा पाया गया कि नित्य प्रति 10-12 मिनट ईश्वर के नाम का स्मरण करने से 15-20% याददास्त बढ़ती है।20-25%आत्म विश्वास और इच्छा शक्ति बढ़ती है।20% बफर कैपेसिटी बढ़ती है,जिससे डर असफलता, बाधा, रुकावट से होने वाली हानि का असर कम होने लगता है। व्यक्ति किसी कठिन परिस्थिति को बड़े आसानी से हैंडल करने के योग्य बनता है,इसके अलावा 20%रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है।
लेखक: साहित्यकार, वार्ताकार, शिक्षाविद और प्रथम श्रेणी का पूर्व अधिकारी है।
Tags:
संपादकीय/पूजा