संपादकीय/कविता/ अमन और सकून

अमन वो सकूं? कहां आज कल है। (कविता)

अमन वो सकूं? कहां आज कल है।           (कविता) लज्जत न दिखती,गुम आज सीरत, दूषण का,फैला जहर आजकल है…

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