जुगनू की चमक भर जीवन अपना
जुगनू की चमक भर जीवन अपना,
किस बात का कैसा अहंकार।
जितना भी जीवन मिला प्रभु से,
फैला बाँहें कर लो सत्कार।
जितने भी दिन आए हिस्से में,
सुंदर,अद्भुत कुछ काम करें ।
स्वास्थ्य सुधारें, प्रेम सवारें,
जग में अपना नाम करें।
घृणा,द्वेष ,नफ़रत के लिए,
नहीं हो कभी, कोई स्थान।
सीखें नया कुछ, करें नया कुछ,
तरक्की करें नित, पाएं सम्मान।
जुगनू की चमक भर जीवन अपना,
सर्वोत्तम इसका हो उपयोग।
सोच नई हो, दृष्टि नई हो,
करें साधनों का सुंदर उपभोग।
कवि- चंद्रकांत पांडेय,
वरिष्ठ शिक्षक,मुंबई पब्लिक स्कूल
गोविन्द नगर, मालाड ( पूर्व)