नव वर्ष तेरा अभिनंदन।

नव वर्ष तेरा अभिनंदन। 
        (कविता)
 
नए वर्ष में हर घर आँगन 
सुवासित हो जैसे उपवन ॥

आगत का उजियारा वंदन|
दमके धरा व सबका तन॥

दुखियों के खत्म हो क्रंदन ।
कृत संकल्पित हो अन्तर्मन।।

असंतोष का अनुदिन मर्दन।
सुख शांति का हो संवर्द्धन।।

वाणी कर्म का ऐसा संयम।
प्रमुदित रहे स्वजीवन कानन ॥

शुद्ध चेतना का बस सर्जन।
पापाचार विरत हो जीवन ॥

जन्तु वनस्पति का भी वर्धन।
नए वर्ष का नव अभिनंदन ॥

रचनाकार:  डॉक्टर डी आर
          विश्वकर्मा                                     
सुन्दरपुर     वाराणसी- 05

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