स्वच्छता अभियान, जन जन का मान
(सारगर्भित मुक्तक)
चाहते हो यदि आप, लक्ष्मी जी का रहे साथ,
घर और मन में भी , शुद्धता को बसाइए।
शान्ति और सुख संग,खुशियाँ अपार मिले,
गन्दगी को आदत से,दूर बस भगाइये।।
स्वच्छता वरदान मित्र,बढ़ाये सबकी शान,
गन्दगी बीमारी है,मन को समझाइये।
काया निरोगी होवे,भाव भी परिशुद्ध बने,
स्वच्छता अभियान को,दिल से अपनाइये।।
साफ़ और सफ़ाई में सबकी भलाई मान,
घर और बाहर भी,रीति यह चलाइये।
कूढ़ा और करकट बने,एक दिन जानलेवा,
स्वच्छता मिशन को,हर जन तक फैलाइये।
चाहते हो यदि,बाल बच्चे हमारे स्वस्थ्य रहें,
मेरी बात मान शुद्ध चेतना को बनाइये ।
गाढ़ी कमाई न ख़र्च हो,बीमारी पर तो,
स्वच्छता के साथ,जीवन शैली अपनाइए ।।
रोग ८० फ़िशद दूर होते,साफ़ जल से ही,
पूर्वजों की बात मान,शुद्ध जल पिलाइये।
अभी कुछ लोग भाई,खुले में ही शौच करें,
आम जन स्वास्थ्य हेतु,सबको समझाइये।।
गाँव गाँव स्वच्छता का जारी अभियान प्रिय,
आप भी अनुदान लें,शौचालय बनवाइये।
स्वच्छता से देवता भी होते हैं प्रसन्न सदा,
साफ़ और सफ़ाई को,बस गले से लगाइये।।
रचनाकार : डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा”विज्ञ”
पूर्व ज़िला विकास अधिकारी/परियोजना निदेशक
(नेहरू युवा केंद्र वाराणसी के प्रेरक वार्ताकार/निर्णायक
मंडल के सम्मानित सदस्य)