कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस AI): उससे जुड़ी कुछ गंभीर चुनौतियाँ व पहल ; एक विवेचन : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है ?आइए!इसे इस तरह गंभीरता से समझें।साथियों जैसे हमारी अक्ल सिखती है,वैसे ही मशीन को सीखा देना कि वे स्वम सोचे समझे और फैसला करे।फर्क बस इतना है,कि मानव अनुभव से सीखता है और मशीन डेटा से।मित्रों!आदमी के अक्ल वाली मशीन अभी बनी नहीं,परन्तु वैज्ञानिक यह स्वप्न जरूर देख रहे हैं।कृत्रिम बुद्धिमत्ता बिजली जैसी ही है-जैसे बिजली दिखती नहीं परन्तु पंखा चलाती है,बल्ब जलाती है,वैसे ही AI मानव जीवन को आसान बनाती है।कृत्रिम बुद्धिमत्ता मतलब ऐसी मशीन जिसे हमने इतना डेटा देकर सीखा दिया कि वह स्वम सीख कर हमारा काम कर दे;परन्तु मालिक हमीं रहेंगे,बस मुंशी कंप्यूटर बन जाएगा या मशीन बन जाएगी-यही कृत्रिम बुद्धिमत्ता जिसे अंग्रेजी में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस(AI) कहते हैं।अगर एक बच्चे को हजारों बार आम दिखाए तो वह अगली बार तुरन्त आम के विषय में बता देगा।यही मशीन को किसी विषय के बारे में पर्याप्त डेटा उपलब्ध करा दें तो वह भी उस विषय के बारे में सब जानकारी दे देगी,यही मशीन लर्निंग है,कृत्रिम बुद्धिमत्ता है।
फ़ोन की,की-बोर्ड में तुम”क”लिखो तो वह कैसे हो,सूझा देता है,ये AI है तुम्हारी लिखावट से सीख गया,यू ट्यूब रील्स आदि भी कई सूचनाएँ देते हैं यदि तुम दो वीडियो कॉमेडी के देखो तीसरा अपने आप आ जाएगा।AI ने तुम्हारी पसंद पकड़ ली।गूगल मैप लाल लाइन दिखाकर बोलता है आगे जाम है,दूसरा रास्ता लो,यह हजारों फ़ोन के लोकेशन से सीखकर बताता है।कैमरा फ़ोटो खिचते ही चेहरा पहचान कर फोकस कर लेता है।गोल रोटी और चाँद में फर्क कर लेता है।AI ड्रोन खेत के ऊपर से उड़कर बता देता है कि किस कोने में फसल पीली पड़ी है,पानी डालने की आवश्यकता है।बड़े माल में बिल बनते बनते पता चल जाता है कि दीवाली पर कौन सा सामान ज़्यादा बिकेगा,वैसे ही विक्रेता तैयारी कर लेता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता न भगवान है,न शैतान,वह दर्पण है ।जैसा चेहरा वैसा प्रतिबिम्ब देता है,यदि हम उसे डेटा नफ़रत का देंगे तो वह नफ़रत सीख लेगा।यदि करुणा का दोगे तो करुणा सीख लेगा।हम सभी जानते हैं कि अग्नि रोटी भी पकाती है और घर भी जलाती है,परमाणु बिजली भी देता है और विनाशकारी भी होता है,अब हम उसे किस तरह किस रूप में प्रयोग करते हैं।
AI जब तुम्हारी नौकरी खा जाए, तुम्हारा चुनाव तय कर दे, तुम्हारे प्रेम पत्र लिख दे-तब वह मनुष्य से उसका मनुष्यत्व छीन लेगा, तब प्रश्न उठेगा कि हमने सुविधा की क़ीमत पर स्वतन्त्रता तो नहीं बेच दी? यदि AI अधर्म की सेवा में लग जाए तो वह सुख नहीं सर्वनाश कर देगा।
मानव जब सीखता है तो उसके पास अनुभूति और अनुभव होता है, जब कि AI के पास सिर्फ़ डेटा है। वह विरह तो लिख सकता है, पर विरह सह नहीं सकता। मृत्यु पर निबन्ध तो लिख सकता है, लेकिन मृत्यु का भय AI नहीं जानता।
जब घोड़ा था तो घोड़ागाड़ी वाला जरूरी था, इंजन आया अब घोड़ा गाड़ी समाप्त, उसी प्रकार AI बुद्धि का इंजन है और मानव ने यदि बुद्धि को ही अपनी पहचान बना ली तो वह अजायबघर चला ही जाएगा।
उपनिषद में कहा गया है- मानव देह नहीं, बुद्धि भी नहीं, वह चैतन्य है। वैसे ही AI बुद्धि में जीत सकता है,चैतन्य में नहीं। मित्रों दया प्रेम करुणा त्याग मौन इनका कोई कोड नहीं होता। AI साधन रहे- साध्य न बने। हल ने किसान की जगह नहीं ली, किसान को सहूलियत दी,कंप्यूटर ने मुनीम की जगह नहीं ली,हिसाब किताब को तेज बनाया।इसीलिए कहते हैं कि AI को हमे सारथी बनाना पड़ेगा,रथी नहीं।AI न अच्छा है न बुरा वह संभावना है।उसे हमे वरदान बनाना है या अभिशाप यह चुनाव मानव करेगा न कि ऐल्गोरिद्म, अब अल्गोरिदम क्या है ?आयिए इसे समझें। अल्गोरिदम यह काम करने का नुस्खा है। रेसिपी की तरह-मान लें तुम्हें चाय बनानी है,तो तुम दिमाग़ में क्या सोचते हो? पहला गैस जलाओगे।दूसरा भगोने में पानी डालोगे।तीसरा उबाल आने दोगे।चौथा चाय की पत्ती व चीनी डालोगे।पाँचवाँ दूध डालोगे।छठवाँ 2 मिनट उबाल आने दोगे।सातवाँ छानकर कप में डालोगे…यही एल्गोरिदम है।स्टेप बाई स्टेप निर्देश,जिसको क्रम से फ़ॉलो करके हर बार चाय बनाई जा सकती है।न कम न ज़्यादा हर बार एक जैसी।इसे यूँ समझ सकते हैं कि एक निश्चित और क्रमवार प्रक्रिया करके कोई इंसान या मशीन एक तय काम को,शुरू से अंत तक पूरा कर सकता है।यही चाय वाला नुस्खा बस इंसान की जगह कंप्यूटर फ़ॉलो करता है;परन्तु कंप्यूटर नादान है;जब कि इंसान अनुभववान।कंप्यूटर को नपे तुले कदम की ज़रूरत पड़ती है,परन्तु इंसान में ऐसा नहीं।जिसके पास बेहतर नुस्खा उसका काम बेहतर,यही वजह है कि जिस एप का एल्गोरिदम बेहतर होता है वह एप ज़्यादा इस्तेमाल होता है।सत्य ही कहा गया है जो अपने यंत्रों का दास बन जाता है,वह अपना भविष्य खो देता है।और जो यंत्रों को दास बनाये रखे,वही कालजयी कहलाता है।
AI से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ और पहल पर भी आइये विचार करते चलें।आज जो चुनौतियाँ और पहल की ज़रूरत है वह,
1-रोज़गार का संकट और सामाजिक असमानता-AI मशीनों को मानव बुद्धि की नक़ल करने में सक्षम बनाता है,जिससे चिकित्सा,शिक्षा,और रक्षा जैसे क्षेत्रों में डेटा विश्लेषण से लेकर जटिल निर्णय लेने तक के काम स्वायत्त हो रहें हैं।लेकिन यह स्वायत्तता बड़े पैमाने पर रोजगार के विस्थापन का कारण बन सकती है।यह तकनीक न केवल शारीरिक बल्कि बौद्धिक कार्यों को तेजी से अपना रही है,जिससे समाज में आर्थिक असमानता बढ़ रही है।
2-एल्गोरिदम पूर्वाग्रह और भेदभाव पूर्ण होने की संभावना-AI सिस्टम डेटा पर निर्भर करते है,यदि प्रशिक्षण डेटा में दोष या पक्षपातपूर्ण है,तो AI द्वारा लिए गए निर्णय भी भेदभावपूर्ण हो सकते हैं।भर्ती प्रक्रियायाओं,क्रेडिट योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में AI का उपयोग करते समय ऐसे उदाहरण सामने आए हैं,जहाँ महिला और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के साथ भेदभाव हुआ जो समाज में मौजूद पूर्वाग्रहों को और मजबूत कर सकता है।
3-जवाब देही का अभाव-जब AI सिस्टम स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं,तो यह निर्धारित करना कठिन हो जाता है कि किसी ग़लत निर्णय के लिए कौन जिम्मेदार है-डेवलपर,उपयोगकर्ता या मशीन स्वम्।यह जबाबदेही की एक बड़ी कमी है,विशेष रूप से स्वायत्त वाहनों या चिकित्सा निदान के सन्दर्भ में।
4-सुरक्षा और युद्ध के ख़तरे-AI का उपयोग सैन्य प्रणालियों में किया जा रहा है,जैसेAI आधारित युद्ध।ऐसे जेनरेटिव AI सक्षम ड्रोन दुश्मन के रडार पर स्वतः हमला कर सकते हैं,यह न केवल तकनीक बढ़त है,बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से वैश्विक चिंता का कारण भी है।
5-मानवीय संवेदनाओं का अभाव-AI ज्ञान को संसाधित कर सकता है,लेकिन उसमें संवेदना,भावनाओं और आध्यात्मिक विकास के लिए खतरा बन सकता है,यदि हम इस पर पूरी तरह निर्भर हो जाएँ।
6-नियंत्रण से बाहर जाने का जोखिम-AI बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और ऐसी चिंताएँ हैं कि आने वाले समय में यह मानव बुद्धि से,बहुत आगे निकल सकता है,जिससे यह हमारे नियंत्रण से बाहर हो सकता है।यह चींटी और बरगद जैसी स्थिति बना सकता है,जहाँ मानव AI के सामने बहुत छोटा हो सकता है।इसीलिए कहते हैं कि AI दोधारी तलवार है,जिससे मानवता के लिए अपरमित क्षमता है,लेकिन साथ ही साथ यह गहरे नैतिक,सामाजिक और सुरक्षा जोखिम भी लेकर आया है।इसके ख़तरों को कम करने और इसके लाभों को प्राप्त करने के लिए बहुत सावधानी से और नैतिक ढाँचे के भीतर इसे लागू करने की अत्यन्त आवश्यक है।
लेखक: शिक्षाविद्, प्रमुख वार्ताकार, कई पुस्तकों का प्रणयन कर्ता,कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित,वरिष्ठ साहित्यकार और प्रथम श्रेणी का पूर्व अधिकारी है ।
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