परमात्मा विश्वकर्मा जी का मानव स्वरूप में जन्म पूजनोत्सव समारोह के रूप में मनाया गया
अदलाहट :
सृष्टि रचयिता ,सृजनकर्ता परमपिता ,परमेश्वर परब्रह्म ,परमात्मा प्रभु विश्वकर्मा जी की सृष्टि को श्रृंगारित करने हेतु मानव स्वरूप में हुई कन्या संक्रान्ति 17 सितंबर 2026 जन्म जयंती पर उनके विशेष पूजनोत्सव समारोह को आदि देव श्री विश्वकर्मा मंदिर शिवाला , अदलहाट मीरजापुर में आदिदेव श्री विश्वकर्मा संस्कृति पीठ, विश्वकर्मा ब्रदर्स, विश्वकर्मा इलेक्ट्रिकल्स एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, वीकेएम एसोसिएट्स अदलहाट मिर्जापुर में बड़े ही विधि विधान से उल्लास पूर्वक मनाया गया। सर्वप्रथम प्रात: 5:00 बजे परम पूज्य विज्ञ रामाशीष जी महाराज के सानिध्य में विश्वकर्मा ब्रदर्स के अधिष्ठाता प्रमोद कुमार शर्मा जी द्वारा सपत्नीक प्रभु विश्वकर्मा जी का पूजन अर्चन करते हुए विश्वकर्मा जी का संगीतमय संकीर्तन का शुभारंभ 6 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हुआ। 7 बजकर 58 मिनट पर कन्या संक्रांति के शुभारंभ पर प्रभु विश्वकर्मा जी की जयंती उनकी आरती कर मनाया गया। दिन भर चले विश्वकर्मा संकीर्तन में सैकड़ो की संख्या में विश्वकर्मा चरणानुरागियों ने संगीतमय संकीर्तन में प्रतिभाग किया। तथा प्रभु विश्वकर्मा के प्रति आस्था एवं श्रद्धा में अपने आप को तराबोर रखे गायक कलाकारों ने विभिन्न धुनों में प्रभु विश्वकर्मा जी का संकीर्तन गायन कर नगर वासियों का मन मोह लिए। सभी गायक कलाकारों का पीठ द्वारा अंगवस्त्रम माल्यार्पण एवं पुरस्कार देकर स्वागत सम्मान किया गया। सायं 6:30 बजे विश्वकर्मा जी के संगीतमय संकीर्तन के समापन के पश्चात संगीत प्रेमियों ने प्रभु विश्वकर्मा जी के चालीसा का संगीत मय गायन किया। शायं 7:30 बजे तक संगीत मय गायन ,भजन चलता रहा। रात 7:30 बजे से 9:00 बजे तक विश्वकर्मा जी की पंच अध्यायी व्रत कथा परम पूज्य विज्ञ राम आशीष जी महाराज के मुखारविंद से श्रवण करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तत्पश्चात हवन एवं आरती की गई। आरती के पश्चात आदि देव श्री विश्वकर्मा संस्कृति पीठ द्वारा प्रभु विश्वकर्मा जी का पूजा विधान पुस्तक परम पूज्य विज्ञ रामाशीष जी महाराज एवं श्रीमती मनोरमा शर्मा व इंजी. विनोद कुमार शर्मा के कर कमलों द्वारा विमोचन किया गया। अपने उद्बोधन में इंजीनियर विनोद कुमार शर्मा द्वारा अवगत कराया गया कि सृष्टि रचयिता, सृजनकर्ता, परब्रह्म परमात्मा परमपिता परमेश्वर प्रभु विश्वकर्मा जी ने मानव स्वरूप में अवतरण इस सृष्टि को श्रृंगारित करने हेतु लिया । क्योंकि प्रभु विश्वकर्मा जी का विश्वास कर्म ज्ञान और विज्ञान में रहा, उनके द्वारा किसी तंत्र मंत्र जादू टोना का सहारा नहीं लिया गया सर्वप्रथम उनके द्वारा इस सृष्टि का सृजन ब्रह्मा ,विष्णु एवं महेश के द्वारा अपने स्थूल शरीर से उत्पन्न कर कराया गया।
फिर उसमें असातीत सफलता न होने के कारण कर्म विज्ञान एवं कर्मफल के सिद्धांत पर किया गया। फिर सृष्टि के सृजन के पश्चात जल ,थल ,नभ,जीव, जंतु के सृजन के पश्चात उनके भौतिक संसाधनों हेतु पृथ्वी पर मानव स्वरूप में जन्म लिया गया। तथा अपने मानस पुत्रों के सहयोग से इस पूरे सृष्टि को कर्म ,कला, कौशल, ज्ञान ,विज्ञान से श्रृंगारित किया गया। जिसके लिए हम सभी को प्रभु विश्वकर्मा जी का आभार एवं धन्यवाद प्रकट करना चाहिए तथा उनके व्यक्तित्व कृतित्व में आस्था एवं विश्वास बनाए रखना चाहिए। आदि देव श्री विश्वकर्मा संस्कृति पीठ महानतम विश्वकर्मा संस्कृति की पुनर्स्थापना हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेगी। इसमें परम पूज्य गुरु जी विज्ञ राम आशीष जी महाराज का आशीर्वाद सदैव प्राप्त होता रहे ऐसी अपेक्षा करते हैं। अंत में समस्त उपस्थित नगरवासियो एवं विश्वकर्मा चरणानुरागियों ने प्रभु विश्वकर्मा जी का प्रसाद एवं भोजन ग्रहण किया। सभी को उपयुक्त दान दक्षिणा देकर, प्रभु विश्वकर्मा महात्म्य से संबंधित पुस्तकें भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करते तथा प्रभु विश्वकर्मा जी की पूजन उत्सव समारोह में आने हेतु धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विदा किया गया।