विश्वपति भगवान विश्वकर्मा
विश्वदेव की करें प्रार्थना,उनको शीश नवायें।
पूजा निश दिन करें सदा,श्रद्धा से पुष्प चढ़ावें।।
मन पवित्र रख उन्हें मनायें,उनके गुण ही गाएं।
बहु देवों में ना उलझें,बस एक देव अपनायें।।
विश्वपति ने दिया सभी को,साधन और सहारा।
जीवन सबका मंगल करता,जिसने उसे पुकारा।।
अंतस् में धारण कर उनको,सम्मुख दीप जलाये।
होगी सभी मुरादें पूरी,अभिलाषित फल पावें।।
फल पुष्प मिष्ठान चढ़ा कर,उनसे मन्नत माँगें।
सच में वह है,परम पुरुष,कोई ना उसके आगे।।
पति पत्नी बच्चों संग हम,आओ आरती उतारें।
उनकी कृपा वरषती क्षण में,उनके रहें सहारे।।
सृष्टि रचयिता ने ही ,सारे देवों के अस्त्र बनाये।
वही एक ब्रह्मांड का नायक,शरण उसी के जायें।।
सभी जीव पाते हैं उनसे ,प्रति दिन एक निवाला।
भ्राता बहनें ये भी जाने,प्रभु विश्वकर्मा रखवाला।।
विश्वकर्मा वंशज ने पाया, गौरव संग ख़ुशहाली।
जन्मजात ब्राह्मण होता है,हाथ न रहता ख़ाली।।
रचनाकार:डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा,वाराणसी