संपादकीय/ प्रेम विरह दोहा

गौतम विश्वकर्मा जी द्वारा रचित प्रेम - विरह (दोहा)

गौतम विश्वकर्मा जी द्वारा रचित प्रेम  - विरह (दोहा) मन बहके गलियन बीच, गोरी करे पुकार। दिल खोले ब…

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