गणपति विसर्जन
प्रथम पूज्य श्री गणेश,आज विदा किए जायेंगे।
आशा बस इतनी सी,वेअगले वर्ष जल्दीआएंगे।
प्रतिदिन की सुंदर पूजा,आरती ने मन मोह लिया।
गली,सड़क,चौराहों पर,भक्तों ने भक्ति खोज लिया।
भक्ति भाव बरसाने वाले प्रभु,स्वधाम चले जाएँगे।
नाचते,गाते,ढोल बजाते भक्त विदा कर आएंगे।
पिछली विपदा भूल भक्तों ने,गजानन की भक्ति किया।
दिल में बिठाया मनोभाव से ,मनवांक्षित आशीष लिया।
रचे बसे गणपति हृदयों में,हरपल,प्रतिपल सुखी रखेंगे।
भक्तों केआराध्य गणेश,कभी किसी को ना दुखी करेंगे।
भक्तों का सैलाबआज,अपने आराध्य को दे रहा विदाई।
खुशी खुशी विसर्जन होगा,दिग् दिगंत में खुशियाँ छाई ।
आज विसर्जन करो सभी,अहंकार जो दिल में समाया।
नफ़रत,आलस्य, राग द्वेष, विसर्जन का मौका आया।
कवि- चंद्रकांत पांडेय,
मुंबई/महाराष्ट्र,
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