नवाचार से बदलेगा शिक्षण का स्वरूप : डॉ. बृजेश महादेव

नवाचार से बदलेगा शिक्षण का स्वरूप : डॉ. बृजेश महादेव

(राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबिनार एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न,  दो दर्जन से अधिक शिक्षक - साहित्यकार हुए सम्मानित)
सोनभद्र : 
 शिक्षक दिवस के अवसर पर परिषदीय साहित्यकार मंच सोनभद्र, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबिनार एवं कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने “शिक्षण में नवाचार : प्रयोग और प्रभाव” विषय पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। 
डॉ बृजेश महादेव ने  कहा कि नवाचार से बदलेगा शिक्षण का स्वरूप,  बदलते शैक्षिक परिवेश में नवाचार गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षण की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है।  शिक्षा के साथ साहित्य, तकनीक और रचनात्मकता के समन्वय को कक्षा-कक्ष की प्रभावशीलता बढ़ाने का कारगर माध्यम बताया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बीना सिंह, पूर्व प्राचार्य, विनानी कॉलेज, मीरजापुर थीं, जबकि डॉ एस.एन. त्यागी, सोनीपत हरियाणा से मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. पी. नजीम बेगम (चेन्नई), श्रीमती दिव्या कत्री (केरल), राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक मु. अदील मंसूरी (लखनऊ), प्रियंका गुप्ता (गाजियाबाद), बबिता गाजियाबाद एवं ऊषा रानी (मेरठ) शामिल रहीं।
कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक डॉ. बृजेश ‘महादेव’, शिक्षक एवं साहित्यकार ने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों के नवाचारी प्रयोगों और शिक्षण-अनुभवों को साझा कर उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि तकनीक, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा स्थानीय संसाधनों के रचनात्मक उपयोग से बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाया जा सकता है।
वेबिनार में यतीन्द्र ठाकुर ‘यति’ इंदौर मध्यप्रदेश, मनोज कुमार शुक्ल सोनभद्र, राजेश कुमार श्रीवास्तव सासाराम बिहार, राकेश कुमार पवार बीकानेर राजस्थान, मुकेश कुमार ठाकुर दाजिर्लिंग पश्चिम बंगाल, मदन शास्त्री ‘धरैल’ हिमाचल प्रदेश, राज बहादुर सिंह यादव जौनपुर एवं सुनील कुमार वर्मा गोंडा सहित वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कवि सम्मेलन में  कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा। काव्यपाठ के माध्यम से शिक्षकों के योगदान, शिक्षा के महत्व और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर दो दर्जन से अधिक शिक्षक एवं साहित्यकारों को प्रशस्ति-पत्र के रूप में ‘कलम का सिपाही सम्मान’ प्रदान कर उनके साहित्यिक एवं शैक्षिक योगदान को सम्मानित किया गया।

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