नूतन वर्ष, २०२६

नूतन वर्ष, २०२६
सूरज की,रश्मियों जैसी,
फैले तेरी ख्याती ।।

जहां रुके थे,गत वर्षों में,
आगे बढ़ना साथी।।

रुपए पैसे,धन दौलत से,
भर जाए,गृह थाती।।

नए उमंग के,साथ परिश्रम,
खुशहाली,है लाती।।

सद चरित्र से,ही जीवन में,
गरिमा,है लहराती।।

जीवन,सदाचरण से गुजरे,
वाणी,अमृत वर्षाती।।

नियती जो,जीवन से लेती, 
वैसी ही,लौटाती ।।

संघर्षों से,सबके जीवन में,
खुशियाँ,है इठलाती।।

पूरी हो,सब इच्छा,आशाएँ, 
जीवन,ना हो मदमाती ।।

रचनाकार:-
डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा 
सुन्दरपुर-वाराणसी-०५

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