विश्वकर्मा प्रभु को; नमन सहस्त्रों बार (कविता)

विश्वकर्मा प्रभु को; नमन सहस्त्रों बार 
                 (कविता)
 
सुख के साधन दियो विश्व को,
लियो, धरा अवतार 
विश्वकर्मा प्रभु को,  
नमन सहस्त्रों बार।

सकल सृष्टि के निर्माता हो,
प्राण शक्ति के दाता हो ।
पंच महाभूतों को रचकर,
दिया जगत आकार…….
विश्वकर्मा प्रभु को,
नमन सहस्त्रों बार।

सब देवों के तुम उपकारी,
कष्ट को हरते यदि हो भारी।
अपने कुल के रक्षा खातिर,
किए दनुज संहार…….
विश्वकर्मा प्रभु को,
नमन सहस्त्रों बार।

सब प्राणी के पालन कर्ता,
सबके तुम हो दुख के हर्ता।
जग के सुख साधन के खातिर,
हुआ तेरा अवतार…….
विश्वकर्मा प्रभु को,
नमन सहस्त्रों बार।

तेरी पूजा है  गुणकारी,
पूरी करते ,अरज हमारी।
अग्र ग्रण्य हो, सब देवों में,
सुख के हो संसार…….
विश्वकर्मा प्रभु को, 
नमन सहस्त्रों बार।

प्रकृति जीव के पालनहारा,
दीनों के हो तुम्हीं सहारा ।
“विज्ञ”को अपने शरण में लिजै,
तुम हो सर्जनहार…….
विश्वकर्मा प्रभु को, 
नमन सहस्त्रों बार।

रचनाकार:  डॉ दयाराम विश्वकर्मा “विज्ञ”
 सुन्दरपुर  वाराणसी-05

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