वसुंधरा को हरियाली से सजाना है (विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष)

वसुंधरा को हरियाली से सजाना है 
(विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष) 
तय कर लिया मैंने अब ये,
मुहिम वसुंधरा की हरियाली का है,
पेड़ लगाओ,जीवन बचाओ ठान लिया है..
क्यूं प्रकृति से कर रहे हो छेड़छाड़,
वन्य पशु तभी तो कर रहे घर उजाड़..
दुश्मनी उनकी हमने स्वयं ही कर ली है,
तभी तो हाथियों के झुंड ने रुख हमारे घर की कर ली है..
आलीशान घर कितने बन रहे,
पेड़ न जाने कितने तुम काट रहे,
जब तुम्हें शुद्ध हवा ही नहीं मिलेगी,
साँस क्या तुम्हारी कभी बचेगी..
देर अब भी नहीं हुई सोचो जरा,
पेड़ अब खुद के नाम की लगा लो जरा..
संजीवनी सा होता है प्रेम इन वृक्षों का,
कभी छाया देती,कभी जीवन रक्षक बन जाती..
वसुंधरा को हरियाली से सजाना है,
बदलती सोच को इससे अब रूबरू कराना है...

- उमा पुपुन
रांची, झारखंड

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