एक - एक का महत्व ( कविता)
एक एक से, होता ग्यारह,
एक एक से, हो पौ बारह।
एक एक मोती गूथने से
बनती है, माला अति सुन्दर।
एक एक जब, जन जुड़ते हैं,
आता है आत्मबल अन्दर ।
एक एक ईटों से जुड़कर,
घर बन जाता है अति प्यारा।
एक एक, अन्न कणों से ही,
बढ़ती जाती,राशि भंडारा ।
एक एक बूँद से मिलकर
निर्मित है, विशाल जल राशि।
एक एक सूतों को, बटकर
बनती है, रस्सी अति खासी।
हर अंगुली के, शक्ति पुंज से,
बनती है, मुट्ठी की ताक़त।
चेहरे पर लग जाए,यदि तो
होती उसकी शक्ति,घातक।
एक एक सदस्य से बनता,
कैसा सुखद प्रसन्न परिवार।
जो बाहरी, और कई घातों से,
करता है, दुश्मन पर वार।
रचनाकार: डॉ. डी आर विश्वकर्मा
सुन्दरपुर वाराणसी