शुचिता पूर्ण राजनीति के संवाहक; माननीय हंस राज जी : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा
मित्रों! !राजनीति को लोकतंत्र में जनता की सेवा करने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।इसीलिए राजनीति की एक परिभाषा यह भी होती है समाज को चलाने की नीति या जनता की नीति,समाज को बेहतर बनाने का जरिया।लेकिन आज के दौर में पैसा,बाहुबल,वोट बैंक,जातीय समीकरण, धर्म,क्षेत्र,भाषा के नाम पर चुनाव लड़े जा रहें हैं एवं राजनीति की जा रही है।आज चुनाव में कुछ अपवादों को छोड़कर,उन्हीं को टिकट दिया जा रहा है,जिनकी जाति के वोटर अधिक हो,वह बाहुबलि हो,पैसे वाला हो।कारण यही है कि आज राजनीति में अच्छे लोगों के लिए स्थान नहीं हैं।परन्तु माननीय हंस राज जी वाराणसी में एक ऐसे नेता हैं जो अपवाद स्वरूप हैं।उनकी निष्ठा लगन के साथ निस्वार्थ लोगों की सेवा का भाव और एक पार्टी की नीतिओं विचारधाराओं को आत्मसात कर दशकों से राजनीति कर रहे हैं, जिन पर केन्द्रीय नेतृत्व भी गर्व करता है, जो वाराणसी जनपद के लिए एक मिशाल है।साथियों माननीय हंस राज जी, एक कर्मठ,क्षेत्र की जनता के प्रति सदैव उपलब्ध रहने वाले, समर्पित और एक सच्चे और नेक दिल के नेता हैं, जिन पर लोग विश्वास करते हैं।हम लोग जब नौकरी में आए तब से उनके व्यक्तित्व को देख रहे हैं।
साथियों!आज राजनीति में लोग अक्सर पाला बदल कर एक दल से दूसरे दल में और तीसरे दल में आते जाते रहते हैं,या यूँ कहें कि”आया राम गया राम”की कहावत चरितार्थ करते है।पाला बदलना एक व्यावहारिक मजबूरी भी कभी कभी दिखती है;परन्तु आत्मीय जनों आज के परिवेश में आदर्श वादी राजनीति शुचितापूर्ण राजनीति असंभव नहीं तो कठिन अवश्य हो गई है।आज कहते हैं कि बिना पैसे के राजनीति नहीं हो सकती,लेकिन माननीय हंसराज जी ने एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है कि…मुश्किल नहीं है कुछ भी,अगर ठान लीजिए।
आज कल के नेता चुनाव जीतने के बाद या टिकट न मिलने पर या पार्टी में कोई तवज्जो न मिलने या कोई बढ़िया पद न मिलने पर या सत्ता के गणित बदलने पर अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थाम ले रहे हैं,परन्तु माननीय हंसराज जी ने कभी ऐसा नहीं किया वे भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा तो कठिन दौर में भी उसका साथ नहीं छोड़ा।ऐसे कई अवसर आए,निराश हुए,लेकिन पार्टी के निर्देशानुसार सर्वसम्मति से परिश्रम करते हुए पार्टी के रीतियों नीतिओं के तहत लगातार भाजपा में कार्य करते रहे यह हम सभी कालेज लाइफ से देख रहे हैं।आज उसी का परिणाम है कि पार्टी उन पर आँख मूँद कर भरोसा करती है।
ऐसा नहीं है कि उनके त्याग का फल,पार्टी ने उन्हें नहीं दिया हो। उन्हें उनके पार्टी में समर्पित भाव से काम करने का फ़ायदा भी मिला।उनकी पार्टी में निष्ठा और लगन के साथ साथ अहर्निश लोगों की सेवा करने का जबरदस्त फ़ायदा भी मिला।उन्हें उच्च नेतृत्व ने तीसरी बार भी वाराणसी जैसे संवेदनशील जिले का जिलाध्यक्ष बनाये रखा और गत वर्ष में उन्हें विधान परिषद का सदस्य(member of legeslative council) भी नियुक्त किया गया;यद्यपि उस पद के लिए काफ़ी लोग लगे रहे परन्तु दो दो बजे रात तक कार्य करने वाला और इतना परिश्रम करने वाला नेता निश्चित रूप से वाराणसी जनपद में rare of the rarest हैं।पार्टी में बहुत कम ही लोग है,जो बिना थके बिना हारे कार्य को करते रहे हैं,जितना हंस राज जी बिना किसी लाभ के करते हैं।
मित्रों उनकी सादगी और ईमानदारी को आम जन भी महसूस करता है।नहीं तो,आज ऐसे पदों पर रहते लोग क्या क्या नहीं सुखोपभोग की चीजें बना लेते हैं परन्तु आज भी हंस राज जी काफ़ी शालीनता के साथ गरिमापूर्ण ढंग से राजनीति करते हैं जिस पर माननीय प्रधानमंत्री(केन्द्रीय नेतृत्व) और माननीय मुख्यमंत्री( राज्य स्तरीय) नेतृत्व दोनों की दृष्टि सकारात्मक बनी रहती है तभी तो गत दिवस मन्त्री मंडल विस्तार में उन्हें राज्य मंत्री का दायित्व भी सौंपा गया है।
कुछ राजनीतिक पंडितों का कहना हो सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर करीब ६% विश्वकर्मा जातियों के वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें मन्त्री पद से नवाज़ा गया है।ख़ैर लोग तरह तरह के क़यास लगाएगे इससे क्या फ़ायदा,लोग लगाते रहे।
मित्रों सच में मैं एकाक बार स्वम् उनसे मिलने गया था तो देखा और महसूस किया कि ऐसे व्यक्तित्व का धनी नेता अपनी कम्युनिटी में मिलना असंभव है;जो रात में दो दो बजे तक कार्य करे और सुबह लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का हल भी सत्यता और ईमानदारी के साथ निकालने में सहयोग करे।माननीय हंसराज जी लोगों की समस्याओं का हल नियमानुसार करते हैं,वे कभी भी अपने पद का दुरुपयोग नहीं करते। लोगों को समझाते भी हैं कि ऐसे नहीं ऐसे इसका हल निकलेगा और यही working style लोगों को पसंद आती है, जिससे उनके व्यक्तित्व का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है।अधिकारियों से भी बढ़ी सहजता और मुलायमियत के साथ बात रखना और कहना कि नियमानुसार उचित हो तो,इसे कर दीजिएगा।उनका यह व्यवहार भी अधिकारियों को पसंद आता है।
आज के परिवेश में ज़्यादातर नेताओं के लिए पार्टी एक मंच है।विचारधारा नहीं। परन्तु माननीय हंसराज जी ने भारतीय जनता पार्टी को ऐसा नहीं समझा।उन्होंने पार्टी की नीतियों को जन जन तक पहुँचाने में,और उसकी विचारधारा के निमित्त काम किया है;जिससे पार्टी में उनकी लोकप्रियता में चार चाँद लगा है।
रोहनिया क्षेत्र में वे एक मसीहा के रूप में लोकप्रिय हैं, जिस पर अधिकतम जनता उन पर विश्वास करती है और उन्हें एक नेक नेता के रूप में सम्मान देती है।वैसे माननीय हंस राज जी ने सामने घाट की कालोनियों में भी water logging की समस्या के निजात हेतु मेरे छोटे भाई डॉक्टर राधेश्याम विश्वकर्मा की भी काफ़ी मदद की है,और उक्त समस्या के निदान हेतु माननीय प्रधान मंत्री जी के भी संज्ञान में नागरिकों की समस्या लायी थी;जिससे उक्त क्षेत्र में भी विकास कार्य तेजी से कराए गए।इतना ही नहीं कोई भी कमज़ोर बिरादरी या उच्च जाति का व्यक्ति, उनसे मिलता है तो उसकी नियमानुसार मदद करने को, वे सदैव तत्पर रहते हैं।
विश्वकर्मा कम्युनिटी के संगठनों के तमाम विवादों को उन्होंने बड़े अच्छे ढंग से सुलझाया है और चाहे हरतीरथ का अति प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर हो या खिड़किया घाट का पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर हो या राजातालाब का विश्वकर्मा मंदिर हो या हरहुआ का विश्वकर्मा मंदिर हो सबके विकास के लिए वहाँ पर बारात घर, अतिथि शाला के निर्माण हेतु धन आबंटन में अपनी निधि से या पर्यटन विभाग से धनराशि दिलवाकर उनका जीर्णोद्धार कराने में प्राणप्रण से मदद किया है। माननीय हंस राज का सपना है कि चौकाघाट के विश्वकर्मा सभा द्वारा निर्मित अतिथि शाला को अच्छी सुविधाओं से संपन्न कराया जाए ताकि अपने समाज के लोग चाहे दक्षिण भारत या अन्य प्रदेशों से आने वाले अपने विश्वकर्मा समाज के लोगों को काशी भ्रमण में एक सर्व सुविधा युक्त आवासीय ठिकाना मिल सके जिससे पर्यटकों को कोई रहने की असुविधा न हो।
अंत में मेरा विचार है कि आज भी नैतिक गिरावट के माहौल में शुचितापूर्ण एवं आदर्श वादी राजनीति संभव है और माननीय हंसराज जी उसके उदाहरण स्वरूप उद्धृत किए जा सकते हैं।
लेखक: प्रथम श्रेणी का पूर्व अधिकारी, कई पुस्तकों का प्रणयनकर्ता, कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित, वरिष्ठ साहित्यकार, मोटिवेशनल स्पीकर, आल इंडिया रेडियो का नियमित वार्ताकार एवं शिक्षाविद है, जिसके नाम से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शोध छात्रों को डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा बेस्ट पेपर अवार्ड (पुरस्कार) दिया जाता है|