जल ही जीवन का है सार और सभ्यता का भी आधार : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा

जल ही जीवन का है सार और सभ्यता का भी आधार  : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा 

मित्रों! सृष्टि का आरम्भ जल से हुआ।पानी की उपलब्धता के कारण ही, हम जीवन की कल्पना कर सकते हैं।कहते भी हैं  कि- ”आपो वा इदम सर्वम”यानि जल ही सब कुछ है।
water is the source of happiness, energy health and piety and is life giving as mother.
पानी जीवन का स्रोत है- जीवन का,संस्कृति का और चेतना का ।पानी से ही कोशिका का निर्माण हुआ है और तभी जीवन, अस्तित्व में आया।वैसे भी दृष्टिपात करें तो सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे से शुरू हुआ जैसे मिस्र की सभ्यता नील नदी के किनारे। मेसोपोटामिया की सभ्यता दजला फरात नदी के किनारे। चीन की सभ्यता ह्वानगहों नदी के किनारे और भारतीय सभ्यता सिंधु नदी के किनारे से ही विकसित, ,पुष्पित और पल्लवित हुईं।
तभी तो हमारे पूर्वज मानते थे कि जल बचाना मानवीय धर्म है और कहते थे”जल ही जीवन है”यह नारा ५००० वर्ष पुराना है।जल की प्रत्येक बूँद मोती है।जल सोने की तुलना में सबसे मूल्यवान है।पानी रंगहीन,गन्धहीन और स्वादहीन प्रकृति का दिया हुआ मानव को एक अनमोल उपहार है।
बहुत पहले,रहीम कवि लिख चुके हैं कि— रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।पानी गये न उबरे,मोती मानुष चून । ।बिना पानी के मोती, मानुष और चूना नहीं उबर सकते।
अथर्व वेद में लिखा है- शुद्धौ न आपस्तन्वे क्षरन्तु ।मतलब शुद्ध जल की बर्बादी नहीं करनी चाहिए।
अथर्वेद 1.33.1 में  लिखा है- कि “शं नो देवीरभिष्टये आपो भवन्तु पीतेये।शं योरभि स्रवन्तु न: ।।”अर्थ-जल देवियाँ हमारे कल्याण के लिए हों; हमे तृप्त करें, हमारे रोग दूर करें।
ऋग्वेद में वर्णित है- अप्सु अन्तः अमृतम्, अप्सु भेषजम। अर्थात् जल में अमृत और औषधीय गुण विद्यमान होता है।
तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है-आपो ज्योति रसो अमृतम् 
मतलब जल चैतन्यता प्रदाता, रस और अमृत है। इसे अध्यात्म में ब्रह्म द्रव्य की संज्ञा दी गयी है। जल आनन्द का स्रोत, ऊर्जा का भण्डार है।कल्याणकारी है। पवित्र करने वाला और माँ की तरह पोषक तथा जीवन दाता है।इसीलिए मनीषिगण कहते हैं कि इस दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन को देवरूप,परमात्मा का प्रसाद मानकर इसका वन्दन संवर्धन एवम् संरक्षण करने की महती आवश्यकता है।संविधान का अनुच्छेद(21)भारतीय नागरिकों के लिए जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करता है।पानी निजी सम्पत्ति नहीं,बल्कि सामुदायिक धरोहर है।भारतीय न्यायालयों ने न सिर्फ़ पानी को मौलिक अधिकार की संज्ञा दी है;बल्कि इसे सार्वजनिक परिसम्पत्ति के रूप में भी परिभाषित किया है।आज सरकारें अपने नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु काफ़ी कार्य कर रही हैं जिससे गाँव और शहरों को शुद्ध जल उपलब्ध हो सके।यह संयुक्त राष्ट्र संघ की देन है।कि 
Governments are working tirelessly to supply fresh water in cities and villages as united nation has ensured that it is right of every citizen of the world to get fresh potable water.
संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में अपने एजेण्डे में विश्व जल दिवस मनाने का संकल्प लिया था,परन्तु 20 मार्च 1993 में प्रथम बार विश्व जल दिवस मनाया गया।अब प्रति वर्ष 22मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।जुलाई 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वच्छ जल की उपलब्धता को भी मानव अधिकार बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया और सितम्बर 2010 में मानवाधिकार परिषद ने आम सहमति से प्रस्ताव पारित कर इस बात की पुष्टि कर दी कि-जल एवम् स्वच्छता व्यक्तियों के लिए मौलिक अधिकार है और इसको सुनिश्चित करना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।
पृथ्वी का 2/3 भाग पानी,यानि 71%पानी से घिरा हुआ है और पानी पीने योग्य सिर्फ3.5%ही है।इसमें से भी ताज़ा पानी मात्र 4%ही है।पृथ्वी का 97%पानी खारा है,जो पीने योग्य नहीं है।पृथ्वी का 1.75%ताज़ा जल वर्फ़ के रूप में है,और.75% पानी जमीन में है,तथा.1%से कम ताज़ा जल का उपयोग हम जीवन के सभी आयामों में कर रहें हैं।विश्व के 700 करोड़ लोग इस ताजे जल को साझा कर रहे हैं।
पानी का उपयोग हम सभी सबसे ज़्यादा 83% कृषि कार्यों में ख़र्च कर रहे हैं और लगभग 17% पानी अन्य कार्यों में इस्तेमाल कर रहे हैं।पानी की बचत पर भी अब हम सभी को ध्यान देना पड़ेगा क्योंकि पानी की उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है।शावर के बजाय यदि व्यक्ति बाल्टी से स्नान करे तो,प्रति व्यक्ति हर माह 160 गैलन पानी बचा सकता है।घरों में पानी के रिसाव को ठीक करके हम पानी बचा सकते हैं।घर का पानी जो बेकार निकलता है,उससे बागवानी की सिंचाई करके,हम पानी की बड़ी मात्रा को बचा सकते हैं।पानी से वाहन धोने के बजाय बाल्टी से वाहन आदि की सफ़ाई कर हम बहुतायद पानी की बचत कर सकते हैं।भारत सरकार द्वारा भी पानी बचाने की कई योजनाएं शुरू की है-जैसे catch the rain,where it falls;when it falls, programme यानि ज्योही जब भी पानी वरसे हम उन्हें पकड़ कर सुरक्षित कर लें।कृषि में लागू की गई योजनाएं हैं-जैसे खेत तालाब,वाटर गन तकनीक,टपक सिंचाई जिसे ड्रीप इरीगेशन सिस्टम,स्प्रिंकलर इरीगेशन जिसे फ़ौवारी सिंचाई योजना कहते हैं।जिससे खेती में अब कम पानी से भी अच्छी पैदावार सम्भव हुई है;और घरों में उपयोग होने वाले कम पानी ख़पत होने वाले शौचालयों का प्रयोग एक नारा दिया गया है- जल बचायें, जीवन बचायें।  साथियों हम पानी के मालिक नहीं हैं; बल्कि रखवाले की तरह हैं। पूर्वजों से उधार लिया है, आगामी पीढ़ी को लौटाना है।
लेखक: ऑल इंडिया रेडियो का वार्ताकार, वरिष्ठ प्रशिक्षक, साहित्यकार, कई पुस्तकों का प्रणयन कर्ता, शिक्षाविद, जिसके नाम से डॉ डी आर विश्वकर्मा बेस्ट पेपर अवार्ड भी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के शोध छात्रों को दिया जाता है। कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित,  प्रथम श्रेणी का अधिकारी रह चुका है।

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