हम नही हैं मरी मछली जो धारा संग बहें (कविता)

हम नही हैं मरी मछली जो धारा संग बहें (कविता)
हम नहीं हैं मरी मछली जो धारा संग बहें।
होते सत्य असत्य कार्य को देखें कुछ न कहें।।
भ्रष्ट आचरण होता देखूँ कुछ ना बोलूँ,
अपने से क्या मतलब कहकर मुंह ना खोलूँ।
तो फिर व्यर्थ जन्म मानव का अर्थ न कलम गहे।।हम नही हैं....
कर विरोध अन्याय झूंठ का भय बिसराओ,
लोगों के भीतर साहस की पौध लगाओ।
सदियों झेली बहुत गुलामी अनगिन जुल्म सहे।।हम नही हैं....
देना दोष भाग्य को छोड़ो उठकर काम करो,
बहा पसीना तोड़ शिखर तुम मुट्ठी गगन भरो।
कंगाली प्राचीर स्वयं ही पौरुष देख ढहे।।हम नही  हैं.....
कुंठित होकर अवसर खोना ये कायरता का लक्षण है,
यदि पाना अधिकार चाहते उसका तो विकल्प एक रण हैं।
ताल ठोंककर मैदां उतरो स्वजन निहार रहे।।हम नहीं हैं....
कितनी किये याचना पाण्डव पाँच न गांव मिला,
जब उठ शस्त्र संभाला कर में कांपा दम्भ किला।
कृष्ण कृपा भी हुई तभी जब अर्जुन अस्त्र गहे।। हम नहीं हैं....

- डाॅ0  रामसमुझ मिश्र अकेला

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