हे विश्वपति करतार,
कर जीवन का उद्धार।
खड़े आज हम तेरे द्वारे।
व्याकुल मन है,तुम्हें पुकारे।।
तुम्हीं हमारे जीवन नैया, के हो खेवनहार,,,,,,
सृजन तेरा,जगत सँवारा।
तेरे कुल का,पाय सहारा।।
तेरी शरण में आया जो भी,पाया तेरा प्यार,,,,,,
करते हो सबकी रखवाली।
महिमा तेरी गज़ब निराली।।
प्रकृति और प्राणों के,तुम ही मात्र एक आधार,,,,,,,
स्वर वाणी के तुम दाता।
भक्तों के हो,भाग्य विधाता।।
पंच महाभूतों के सर्जक,तुमसे है सृष्टि साकार,,,,,,,
निराकार अद्भुत है माया।
चलती है,साँसों से काया।।
तुम्हीं सृष्टि के आदि देव हो,क्यों न करें एतबार,,,,,,
पूजा,तेरी मंगल कारी।
तुम जग के,हो हितकारी।।
अति फलदायक पूजन तेरा,हो अमावस या रविवार,,,,,
सुख साधन,जग को देता।
सुमिरन तेरा,दुःख हर लेता।।
सब देवों के अस्त्र बनाकर,है दिया यतन उपकार,,,,
सब देवों में,तेरी छाया।
तेरा कृत्य,जगत को भाया।।
ग्रह नक्षत्र तारे मण्डल के,गति के हो बने पतवार,,,,,
रचनाकार:डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा,वाराणसी