भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में समय का नियंता, ऊर्जा का केन्द्र व लोक की आत्मा है सूर्य : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा
लोक चेतना में ऊर्जा के प्रत्यक्ष देवता, आरोग्य के प्रदाता और चेतना के पुंज के रूप में भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। सूर्य को भारतीय संस्कृति में, अनादि काल से लोक व सृष्टि की आत्मा व समय के नियंता के रूप में देखा जाता रहा है। यह अंधकार को दूर करने वाला और प्रकाश का अद्भुत स्त्रोत माना गया है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे सौर्यमण्डल का एक अद्भुत तारा कहा जाता है। यह हमारे सौर्य मण्डल का केन्द्र और जीवन का उद्गम माना गया है, जो सभी जीवधारियों और वनस्पतियों को ऊर्जा व प्रकाश प्रदान करता है। सूर्य एक विशाल गोला है; जो अपने गुरुत्वाकर्षण के चारों ओर ग्रहों को घूमाता है। सूर्य की उत्पत्ति आज से लगभग ४.६ अरब वर्ष पूर्व मानी गई है; जब एक विशाल गैस और धूल के बादल अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण संकुचित होने लगा था, इस संकुचन के कारण तापमान और दबाव बढ़ने लगा, जिसके परिणामस्वरूप नाभिकीय अभिक्रियाएँ शुरू हुई और सूर्य अस्तित्व में आया। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि इसके छह परत होते हैं। पहला कोर परत जहाँ नाभिकीय अभिक्रियाएँ होती हैं और ऊर्जा उत्पन्न होती है। दूसरी परत रेडिएटिव जोन की होती है, जहाँ ऊर्जा विकिरण के रूप में फैलती है।तीसरी परत कानवेक्टिव ज़ोन कहलाती है जहाँ ऊर्जा संवहन के रूप में प्रसरित होती है। चौथी परत फ़ोटोस्फ़ीयर है, जहाँ से प्रकाश और ऊर्जा निकलती है। पाँचवी क्रोमोस्फियर का क्षेत्र होता है, जो फ़ोटोस्फ़ीयर के क्षेत्र के ऊपर होता है,जहाँ तापमान बढ़ता है, और छठा कोरोना का क्षेत्र होता है,जो सूर्य के वायुमण्डल का सबसे बाहरी भाग होता है,जहाँ बहुत अधिक तापमान होता है।यह सूर्य पिण्ड का वैज्ञानिक विश्लेषण है।
हमारे मनीषियों का कहना है कि सूर्य की रश्मियों में कुल छह अप्रतिम शक्तियां मौजूद होती हैं।
१- दहनी की शक्ति, सूर्य की रश्मियों में जलाने की क्षमता होती है वह इसी शक्ति का परिणाम होता है।
२- पचनी की शक्ति इस शक्ति द्वारा पाचन क्रिया संपन्न होती है।
३- ध्रुमा की शक्ति इस क्षमता से रश्मियों में लोहित करने की शक्ति आती है।
४- कर्षिणी शक्ति भी सूर्य की किरणों में रहती है, जिससे कोई चीज आकर्षित होती।
५-वर्षिणी की शक्ति से सूर्य की रश्मियाँ, बादलों को आकर्षित कर वर्षा कराने की क्षमता रखती हैं।
६- रसा की शक्ति इस शक्ति के द्वारा रस प्रदान करने की क्षमता रवि रश्मियों से आती है।
इसीलिए हमारे ऋषि गण सूर्य को विराट पुरुष की संज्ञा से विभूषित करते हैं। यह कुल आठ वसुओं में एक माना गया है।कुल ३० दिवस के लगभग सूर्य का संक्रमण काल आता है;जिसे संक्राति के नाम से पुकारा जाता है।सूर्य सभी धर्मों में पूज्य होता है।सूर्य आत्मा का कारक,प्राण शक्ति प्रदाता और बृद्धि का कारक भी होता है इसीलिए इसे सूर्य नारायण भी कह कर संबोधित करते हैं।अंतरिक्ष के सभी ग्रह इसी के इर्द गिर्द परिक्रमा करते रहते हैं।चंद्रमा की चमक भी सूर्य से ही संभव होती है।कोई भी ग्रह सूर्य के बिना उदय नहीं होते।
अति प्राचीन समय में कोई भी मंदिर;सूर्य मंदिर ही कहा जाता था,क्योंकि प्राचीन समय में पंच महाभूतों के पूजा का विधान था।बाद में देवी देवताओं की पूजा शुरू हुई।
पौराणिक मान्यता है कि सूर्य को अर्ध्य देने उनका दर्शन करने और सूर्य नमस्कार से शारीरिक मानसिक रोगों का निवारण होता है।पेड़ पौधों वनस्पतियों के विकास और जीवन दाता के रूप में और ऋतुओं के चक्र के विनियमन में सूर्य देव की भूमिका अति महत्वपूर्ण मानी गई है।सूर्य को अज्ञानता को दूर करने वाला,अन्धकार को दूर करने वाला,ज्ञान तेज यश कीर्ति और सफलता को देने वाला माना जाता है।योग साधना में सूर्य को तीसरे नेत्र की ऊर्जा को सक्रिय करने वाला भी माना गया है।सूर्य देव को रविवार का दिन समर्पित किया गया है।मकर संक्रांति और छठ पूजा का त्योहार भी सूर्य के साथ मनाया जाता है।मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है,जिससे ऊर्जा और जीवन को गति मिलती है।
लोक मान्यता के अनुसार सूर्य का रथ सात घोड़ों(साप्ताहिक दिन)और सुनहरी आभा को दर्शाता है। भारतीय लोक कलाओं वास्तुकला और मन्दिरों में सूर्य को बहुतायत प्रदर्शित किया गया है। जैसे-उड़िसा का कोणार्क मंदिर।इसका प्रमुख उदाहरण है। सूर्य को आत्म अनुशासन, निःस्वार्थ सेवा और सतत कर्म को करने की प्रेरणा देने वाला माना गया है। इसी कारण सूर्य की उपासना सूर्य नारायण के रूप में की जाती है। सूर्य आत्म ज्ञान, ज्ञानोदय, सत्य और मानसिक शुद्धि के प्रतीक माने गए हैं, जिनकी पूजा सूर्य नमस्कार और मंत्रों के साथ की जाती है। वेदों में सूर्य के २१ नाम निम्नानुसार वर्णित हैं- विकर्तन, विवश्वान, मार्तण्ड, भाष्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान, लोक चक्षु, गृहेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोकेश, कर्ता, हर्ता, तमिस्त्रहा,
तपन, तापन, शुचि, सप्ताश्ववाहन, गभास्तिहस्त, ब्रह्मा, सर्वदेवनस्कृत।
उन्हें जल देते समय १२ मंत्रों के साथ अर्ध्य देने की परंपरा है।जैसे ॐ मित्राय नमः इससे मित्रता व सम्बंध पनपते हैं।ॐ रवये नमः यह मंत्र विश्वास जगाने में मदद करता है।ॐ सूर्याय नमः इस मंत्र से रोग और कमजोरी दूर होती है।ॐ भानवे नमः इसके जाप से आत्मबल और सम्मान में वृद्धि होती है।ॐ खगाय नमः इस मंत्र के जाप से भ्रम और अज्ञान मिटता है।ॐ पूषणे नमः इस मंत्र के उच्चारण से शरीर पुष्ट होता है और ऊर्जा मिलती है।यह पोषण प्रदान करता है।ॐ हिरण्यगर्भाय नमः इससे स्थिरता मन को प्राप्त होती है।ॐ मरीचये नमः इसके जाप से भाग्य जागृत होता है। ॐ आदित्याय नमः इसके जाप से नकारात्मक विचारों का लोप होता है।ॐ सवित्रे नमः इस मंत्र के जाप से पितृत्व,अधिकार और नेतृत्व की प्राप्ति होती है। ॐ अर्काय नमः इस मंत्र के जाप से सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
ॐ भाष्कराय नमः इसके जाप से डर और आलस्य की समाप्ति होती है।
सूर्य को आत्मा व जीवन का स्रोत माना गया है। सूर्य को आत्मा और पिता का कारक माना गया है।यह जीव में प्राण शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है।सूर्य ज्ञान और प्रकाश देने वाले समझे जाते हैं;ये अन्धकार को दूर कर दिव्य ज्ञान और आत्मसाक्षत्कार की ओर ले जाने वाले माने जाते हैं। सूर्य बुरी शक्तियों से साधक की रक्षा करते हैं और एकाग्रता प्रदान करने में भी सहायक होते हैं। योग परम्परा में सूर्य देवता को सूर्य नमस्कार द्वारा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने और शरीर और मन को ऊर्जा को प्राप्त करने में मदद मिलती है। सूर्य को आदित्य और सविता भी कहा गया है, जो ज्ञानोदय का मार्ग प्रशस्त करते हैं गायत्री की आराधना सूर्य को सविता मानकर की जाती है।सूर्य पूजा स्वास्थ्य दीर्घायु प्रदाता के साथ समृद्धि देने वाले देवता के रूप में भी की जाती है। सूर्य उपासना से पवित्रता और सत्व गुण का विकास होता है।
ज्योतिष में तो सूर्य का बलवान होना व्यक्ति के आत्म विश्वास, प्रशासनिक क्षमता और उच्च पद की प्राप्ति का कारक माना जाता है, इसीलिए इन्हें सृष्टि का प्रत्यक्ष देवता मानकर लोग इनकी पूजा आराधना उपासना करते हैं।
लेखक: कई पुस्तकों के प्रणयनकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर, वरिष्ठ प्रशिक्षक, साहित्यकार, शिक्षाविद और कई सम्मानों से विभूषित पूर्व प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं।