शिक्षामंत्री के विद्यालय परिसर में गुटका न खाने के आह्वान का अखिल राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संघ ने किया पूर्ण समर्थन
(नए शिक्षा सत्र के प्रभावी संचालन की चर्चा में शिक्षक संघ को शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम - प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विपुल कुमार भवालिया)
अलवर ( राजस्थान) :
शिक्षामंत्री श्री मदन दिलावर ने शिक्षा विभाग की विभिन्न गतिविधियों के क्रियान्वयन के संबंध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जिसमें अलवर से अखिल राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विपुल कुमार भवालिया व प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार बैरवा शामिल हुए।
शिक्षा संकुल में आयोजित चर्चा सत्र में मुख्य रूप से 1 अप्रैल से नवीन सत्र के आरंभ, मेगा पीटीएम, प्रवेशोत्सव, पाठ्यपुस्तक व यूनिफॉर्म वितरण, शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान और मई माह में प्रस्तावित प्रथम परख के संबंध में चर्चा की गई।
अखिल राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संघ ने निदेशक महोदय को माँग पत्र सौंपते हुए निम्नलिखित माँगें रखी-
1. प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों जिन्होंने NET, Ph.D की उपाधि प्राप्त कर रखी है उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में समायोजित किया जाए या विशेष परिलाभ दिए जाए।
2. स्वामी विवेकानंद राजकीय विद्यालय का, विद्यालय समय महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों के समान किया जाए या केंद्र कर्मचारियों के समान वेतन भत्ते दिये जाए।
3. विद्यालयों में कार्यरत प्रयोगशाला सहायकों का पद नाम बदलकर प्रयोगशाला शिक्षक किया जाए ।
4. एस.ओ.जी. से शीघ्र जाँच करवाकर बाड़मेर में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022 के शिक्षकों का वेतन नियमितीकरण व स्थाईकरण किया जाए।
5. 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार ग्रेजुएटी दी जाए।
6. बी.कॉम., एम. कॉम में समान विषय होने पर वरिष्ट अध्यापकों को व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी जाए।
7. शिक्षकों की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
8. ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों हेतु विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।
9. अधिशेष शिक्षकों का समायोजन अति शीघ्र किया जाए।
10. पदोन्नति में यथावत का तत्काल समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि कार्मिक न तो वर्तमान पद पर ही रहता और न ही उसे पदोन्नति पश्चात जो पद सरकार ने दिया है, उस पर। बीच की स्थिति सबसे दयनीय होती है।
11. जब एक ही भर्ती परीक्षा और एक ही विषय से कार्मिक को नियुक्ति मिलती है तो फिर किसी कार्मिक को लाभ कभी से किसी को कभी से। एक समानता होनी चाहिए व वेतन विसंगति दूर होनी चाहिए।
12. वर्तमान में विद्यालयों में अध्यापन के अलावा सारे कार्य करवाए जाते हैं और साल में एक बार परिणाम न्यून आने पर शिक्षक को दंडित किया जाता है। यह नहीं होना चाहिए।
13. विद्यालयों में कृषि संकाय खोलने के बाद भी अभी तक विद्यालयों को कृषि संकाय के व्याख्याता उपलब्ध नहीं हैं, फिर कैसे कृषि संकाय पढ़ाया जाए।
14. महिलाओ को महिने में एक बार मासिक धर्म अवकाश दिया जाए।
उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर निदेशक महोदय का सकारात्मक रुख के लिए उन्हे धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
शासन सचिव स्कूल शिक्षा श्री कृष्ण कुणाल ने भी संगठन प्रतिनिधियों के विचार सुने व उनसे प्रदेश की शैक्षिक प्रगति में अपनी सार्थक भूमिका निभाने की अपील की।
निदेशक माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा श्री सीताराम जाट ने विभाग की ओर से विद्यार्थी, शिक्षक व कर्मचारी हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। निदेशक द्वारा शिक्षा विभाग में सकारात्मक परिवर्तन करने के लिए संघ ने सराहना की।