“माँ — मेरी पहली दुनिया”
जब भी ज़िंदगी ने मुझे
थोड़ा कमज़ोर पाया है,
माँ, तेरी आवाज़ ने ही
मुझे फिर से हँसना सिखाया है।
तेरे हाथों की वो रोटी
आज भी सबसे खास लगती है,
दुनिया भर की दौलत भी
तेरी ममता के आगे उदास लगती है।
तूने खुद की नींदें बेचकर
मेरे सपनों को सजाया है,
हर दर्द छुपाकर चेहरे पर
बस प्यार ही प्यार दिखाया है।
जब मैं हारकर बैठ जाती हूँ,
तू चुपके से हिम्मत बन जाती है,
मेरी टूटी हुई उम्मीदों में
नई रोशनी भर जाती है।
माँ, तू सिर्फ रिश्ता नहीं,
मेरी दुआओं का नाम है,
मेरे हर अच्छे कल के पीछे
बस तेरा ही योगदान है।
अगर कभी भगवान मिले,
तो बस इतना कहूँगी मैं—
“मुझे हर जन्म में वही माँ देना,
जिसकी गोद में सुकून मिले।”
तेरे बिना ये घर घर नहीं,
तेरे बिना मैं पूरी नहीं,
माँ, तू मेरी पहली मोहब्बत है…
और तेरे जैसा कोई नहीं।
Happy Mother’s Day Maa ❤️
- मनीषा जायसवाल
कोलकाता
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संपादकीय/ मदर्स डे/10 मई