विश्वकर्मा कुल के आत्मीय भाई व बहनों के सर्वांगीण विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स : डाक्टर दयाराम विश्वकर्मा
मेरे आत्मीय भ्राता श्री व बहनों का मेरा अभिवादन !
आज के भौतिक वादी समय में हम अध्यात्म व धार्मिकता से कोसों दूर चले गए हैं;फलस्वरूप आज समृद्धि तो आ रही है परन्तु संस्कार हर घरों से विदा ले रहा है।आज पढ़े लिखे बच्चे अपने माता पिता को वृद्धाश्रम भेज रहे हैं उनकी देख भाल भगवान भरोसे छोड़ रहे हैं।तो आइये हम सभी अपने को और अपने परिवार को आध्यात्मिक और धार्मिक बनाकर सर्वांगीण विकास हेतु मनन चिंतन करें।
1- सर्वप्रथम हम सभी को ब्रह्म मुहूर्त में जग जाने का अभ्यासी होना होगा।ब्रह्म मुहूर्त का मतलब सूर्योदय से 1:30 घंटे पहले जागना।इस मुहूर्त में २१ दिन तक लगातार जो भी संकल्प लेंगें भगवान विश्वकर्मा उसे अवश्य पूर्ण करते हैं।
2-बिस्तर से उठने से पहले अपनी हथेलियों को देखें और ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः मंत्र को पाँच बार दुहरायें।
3-बिस्तर से पाँव जमीन पर पहले वही रखें जिस तरफ़ से सांस नासिका छिद्र से निकल रही है यदि आप की बाएँ रंध्र से सांस आ रही है तो बाया पैर जमीन पर पहले रखें और यदि दाँयें से सांस आ रही है तो दायाँ पैर जमीन पर रखें।
4-पैर जमीन पर रखकर धरती माँ को प्रणाम करें।और दिन में जो शुभता चाहते हो उसका संकल्प लें।
5-घर में बड़े बुजुर्ग या माता पिता हो तो उनका आशीर्वाद लेना न भूलें ।
6-सुबह टहलने जाएं सुबह की हवा अपने आप में दवा होती है जो कई परेशानियों से निजात दिलाती है।
7-कहते हैं कि 100 काम छोड़ स्नान करें और 1000 काम छोड़ भोजन करें।नंगे स्नान न करें दोष पड़ता है।
8-स्नान करने के पश्चात पूजा घर में रखे भगवान विश्वकर्मा जी को सच्चे मन से याद करें और अपने व अपने परिवार की उन्नति हेतु प्रार्थना करें।
9-भोजन करते समय निम्न मंत्र को पढ़कर ही कुछ खायें।
त्वदियम बस्तु गोविन्द, तुभ्यमेव समर्पयेत।
गृहाण सुमुखो भूत्वा,प्रसीद परमेश्वरम् ।।
10- दिन में आप कार्य करने से पहले संकल्प करें कि आज मैं झूठ नहीं बोलूँगा,सत्य बोलूँगा,किसी जीव की हत्या नहीं करूँगा,व्यभिचार नहीं करूँगा।नशा नहीं करूँगा और सदाचारी बनूँगा,क्योंकि सदाचार:परमो धर्म:।सदाचार से उम्र बढ़ती है और व्यभिचार से घटती है।
11-कहीं घर से बाहर निकलें तो माता पिता का आशीर्वाद लेकर,पूजा घर में जाकर भगवान विश्वकर्मा को प्रणाम कर बाहर निकलें।माथे पर नियमित टीका लगाएं।
12- सायं घर आने पर संधि काल में दरवाज़े के बाहर तिल के तेल का दीपक भगवान विश्वकर्मा को अर्पित करें और मंगल कामना करें।
13-रात में सोने से पहले नियमित स्वाध्याय करने की आदत डालें।धार्मिक पुस्तकें पढ़ें या अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें।
14-सोने से पहले निम्नांकित संकल्प लेकर सोने का अभ्यास डालें।मैं प्रसन्नचित आत्मा हूँ।मैं निडर और सदा खुश हूँ।मेरा शरीर स्वस्थ्य और निरोगी रहेगा।भगवान विश्वकर्मा मेरा सब कार्य अच्छे से कर रहे हैं।आप पायेंगे कि एक माह बाद आप में सकारात्मक बदलाव अवश्य दिखने लगेगा।
15-शाम को जल्दी सोने की आदत डालें और सुबह जल्दी उठने की।
कहते भी हैं कि” Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise”.
अपने जीविका के अर्जन हेतु हम सभी को प्राण प्रण से लगना चाहिए क्योंकि अर्थ प्रधान युग में सभी चीजें धन से जुड़ी हुई हैं लेकिन आजीविका के अर्जन में भी शुभ लाभ का ध्यान अवश्य रखें।
हमारी संस्कृति धन अर्जन में भी शुभता के साथ लाभ की प्राप्ति की हिमायती रही है।किसी को कष्ट देकर,व्यभिचार कर,झूठ बोलकर,पाप से धन कमाना नहीं चाहिए।हमारे पूर्वज ईमान की रोटी पर विशेष ध्यान देते थे।सत्य भी है कि यदि आप की नियत साफ़ रहेगी तो किसी भी व्यवसाय में बरक़्कत मिलेगी।चोरी बेईमानी करके रातो रात अमीर होने की लालषा का परित्याग करना चाहिए।कहते भी हैं कि चोरी का धन मोरी में चला जाता है।कबीर दास जी भी कह गए हैं कि “कबीरा आप ठगाइये और न ठगिए कोय”
अपना व्यवहार सभी के साथ अच्छा रखिए।अंतःकरण पवित्र बनाइये।यही आप को प्रसिद्धि दिलाता है।
हा एक बात मेरी कान खोलकर सुन लीजिए कि आप अपनी संगत अच्छे लोगों के साथ करिए और अपने बच्चों के भी संगत पर नज़र रखिए अन्यथा कहते हैं कि…..
“संगत से गुण होत है,संगत से गुण जात।”
आप नहीं पढ़ पाये कोई बात नहीं अपने बच्चों को पढ़ाइये।आप का भी मन पढ़ने का है तो पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती बहुत सारे ओपन यूनिवर्सिटी(विश्वविद्यालय) हैं जिसमें आप घर बैठे दाखिला ले कर अपने बच्चे बच्चियों की शिक्षा का प्रबन्ध कर सकते हैं जिसमें इन्दिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी काफ़ी लोकप्रिय है ।
- डाक्टर दयाराम विश्वकर्मा, सुन्दरपुर वाराणसी