"आत्मीय अनुभूतियों के शब्द चित्र" पुस्तक का भव्य विमोचन हुआ संपन्न
लखनऊ :
दिनांक 17.05.26 को कवि श्री सत्येन्द्र तिवारी जी की दो काव्य कृतियों का एक दिव्य समारोह में लोकार्पण हुआ। उन्होंने कृति आत्मीय अनुभूतियों के शब्द चित्र में सरस छंदों में कानपुर के 48 कवियों के व्यक्तित्व-कृतित्व पर उत्कृष्ट लेखन किया। 'रहे न सहमा कोई आंगन' में उनकी उत्कृष्ट गीत रचनाएं हैं। उन्होंने कई रचनाओं पाठ भी किया।
संस्था 'राग-अनुराग' के सौजन्य से देवनगर, कानपुर में दिनांक 17.05.26 को हुए समारोह में शहर कई कवि और साहित्यकार उपस्थित रहे। सत्येन्द्र तिवारी की कृतियों पर श्री उपेन्द्र वाजपेई, श्री लोकेश शुक्ल, श्री शैलेन्द्र शर्मा, डाॅ विनोद त्रिपाठी आदि ने प्रकाश डाला। इसमें आदरणीय तिवारी जी के विषय में बोलने वाले श्री जय राम जय, श्रीमती शशि शुक्ला, नजर कानपुरी आदि रहे। 'राग अनुराग' संस्था के अध्यक्ष श्री उमाकांत जी गुप्ता और संस्था से जुड़े अन्य लोगों ने भी अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। इस वक़्त लखनऊ में निवास कर रहे सुप्रसिद्ध कवि श्री सत्येन्द्र तिवारी जी ने कानपुर में दशकों जीवनयापन किया है और बैठकों में सक्रिय रहे हैं। 'राग-अनुराग' साहित्यिक संस्था के सौजन्य से देवनगर, कानपुर में तमाम कवि शामिल हुए। मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति लब्ध डाॅ सुरेश अवस्थी ने भाग लिया और प्रभावी समीक्षा प्रस्तुत की। सत्येंद्र जी की कृतियों पर श्री उपेन्द्र वाजपेई, लोकेश शुक्ल, श्री शैलेन्द्र शर्मा, डा विनोद त्रिपाठी, श्री संजर जी आदि ने प्रकाश डाला। सुंदर संचालन सुप्रसिद्ध हास्य कवि श्री दिलीप दुबे ने किया।संचालक श्री दिलीप दुबे ने 'रहे ना-सहमा कोई आंगन' काव्य संग्रह का एक गीत मधुर स्वर में प्रस्तुत किया। संस्था संचालक श्री उमाकांत गुप्त ने शुभकामनाऍं दीं। रोचक संचालन भी हास्य कवि श्री दिलीप दुबे ने किया। एक अविस्मरणीय पुस्तक को पाकर सभी वरिष्ठ साहित्यकार/कवि अत्यंत प्रसन्न हुए।
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संपादकीय/ पुस्तक विमोचन