प्रथम पूज्य हैं देवों में, बाबा सबके विश्वकर्मा

प्रथम पूज्य हैं देवों में, बाबा सबके विश्वकर्मा।
जिसने सारी सृष्टि बनायी, उनका कार्य निराला।
इसीलिए तो सब पंथों ने, उनका नाम संभाला ।।
देकर सबको दिव्य अस्त्र ,पूर्ण किया निज धर्मा—-प्रथम

उनके ही अनुसंधानों से, सब साधन जग पाया।
वेदों ,ग्रंथों और पुराण ने, उनकी महिमा गाया।।
अपने कुल के भ्राता बहनों, पूजें रख शुचि कर्मा—प्रथम

बंद यदि हो कारोबार तो, पूजा से वह चलते।
विश्वपति के सृजन मात्र से, यंत्रों में हैं ढलते।।
विश्व जगत,है समझ चुका ,यह रहस्य,यह मर्मा—प्रथम

बँटें हुए हम जाति पंथ में ,संग लिए, रिवाज।
ब्रह्मांड के नायक वह हैं, पूरन करता काज।।
उनके नाम की महिमा गाओ, दूर रखो षट्कर्मा—प्रथम

वास्तु देव के रूप में माने, आदि काल से दुनिया।
घर में जब नित पूजा होगी, जाने मुन्ना मुनिया।।
क्यों पहचान छिपाते हैं, लिख कर नाम में शर्मा—प्रथम 

प्रथम पूज्य हैं देवों में, बाबा सबके विश्वकर्मा।।

रचनाकार: डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा(वाराणसी)

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