भारतीय प्रशासनिक सेवाओं हेतु सामर्थ्य और काबिलियत पैदा करने की रणनीति कैसे? डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा

भारतीय प्रशासनिक सेवाओं हेतु सामर्थ्य और काबिलियत पैदा करने की रणनीति कैसे?   डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा
साथियों, !यह सभी युवा, युवतियों की चाह होती है कि हम केन्द्रीय प्रशासनिक सेवाओं में नौकरी प्राप्त करें; लेकिन सिर्फ कामना करने से ही इच्छाओं की पूर्ति तो नहीं होती। इसके लिए काफी मेहनत करने और योजना बद्ध अध्ययन करने की सटीक आवश्यकता होती है। 
       तो आइए हम कैसे लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिए रणनीति बना कर कैसे प्रशासनिक अधिकारी बन सकते हैं,पर गंभीरता से विचार करें।मित्रों सर्वप्रथम तो हमें लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी हेतु आयु सीमा व योग्यता पर विचार करना होगा।तो इसके लिए कोई भी सामान्य वर्ग की युवा,युवतियाँ जिनकी उम्र 21-32 वर्ष के मध्य हो और वे स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण हो वे इस परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।उन्हें छह बार परीक्षा देने की अनुमति दी गई है।अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में 03 वर्ष की छूट दी गई है अर्थात् वे 21-35 वर्ष की आयु तक परीक्षा दे सकते हैं। उन्हें नौ बार उक्त परीक्षा में सम्मलित होने की अनुमति दी गई है।वहीं अनुसूचित जाति व जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 21-37 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई है।ऐसे उम्मीदवार के लिए21- 37 वर्ष तक चाहे जितनी बार परीक्षा वे दे सकते हैं।आयोग ने विकलांग अभ्यर्थियों के लिए 42 वर्ष तक उक्त परीक्षा में शामिल होने का नियम निर्धारित किया है।इनके लिए भी अटेम्प्ट की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है।आयु की गणना परीक्षा वर्ष के 1 जुलाई को आधार मान कर किया जाता है।आयु सीमा विभिन्न राज्य सरकारों के आयोगों में कुछ भिन्न भी होता है।
अब आइये उक्त परीक्षा के पाठ्यक्रम और पैटर्न पर चर्चा करें मित्रों लोक सेवा आयोग की उक्त परीक्षा तीन चरणों में संपन्न होती है। पहला प्रारंभिक परीक्षा-इस परीक्षा में कुल दो पेपर 200-200 अंकों के होते हैं।पहला प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन का होता है और दूसरा पेपर CSAT जिसे(सिविल सर्विस एप्टीट्यूट टेस्ट)कहते हैं,का होता है।दर असल प्रारंभिक परीक्षा एक तरह का स्क्रीनिंग टेस्ट है,जो बहुतायत अभ्यर्थियों में से योग्य को परीक्षा देने हेतु,चयन करने का तरीका है।साथियों प्रारंभिक परीक्षा के अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते और तो और CSAT के पेपर में 33% अंक यानि कुल 66 अंक 200 के अंक में अवश्य प्राप्त करने होते हैं तभी आप का पहले पेपर का मूल्यांकन होता है यानि अगर आप CSAT के पेपर में 66 अंक नहीं प्राप्त करेंगे तो आप प्रारंभिक परीक्षा नहीं क्वालीफाई कर पाएंगे।प्रारंभिक परीक्षा के पहले पेपर के कट ऑफ़ अंक के आधार पर मेरिट बनती है और अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा हेतु अर्ह घोषित किया जाता है।
अब आइये मुख्य परीक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त करें।इसमें कुल 07 प्रश्न पत्र होते हैं।पहला प्रश्न पत्र पेपर A होता है,जो भारतीय भाषा में से एक की परीक्षा देनी होती है।जैसे हिन्दी तेलगू या अन्य भाषा जो 300 अंक का होता है उसमें 25% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।इसी प्रकार प्रश्न पत्र पेपर B जो अंग्रेजी का होता है।यह भी 300 अंक का होता है।इसमें भी उम्मीदवार को 25% अंक यानि 75 अंक हाशिल करने होते हैं।यह दोनों पेपर A और B क्वालीफाइंग प्रश्न पत्र होते हैं यदि कोई अभ्यर्थी दोनों पेपर में 75-75 अंक नहीं प्राप्त करते तो वे डिसक्वालीफाई यानि अयोग्य हो जाते हैं।यहाँ यह बताना जरूरी है कि इन दोनों पेपर्स का भी मार्क मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते।अब आता है तीसरा पेपर जो निबन्ध लेखन का होता है।यह 250 अंक का होता है।इसमें दो टॉपिक पर निबन्ध लिखने होते हैं जो 125-125 अंक के होते हैं।इसके बाद चौथा पेपर GS-1 का होता है यह 250 अंक का होता है,जिसमें इतिहास भूगोल वगैरह से प्रश्न पूछे जाते हैं।पाँचवाँ पेपर GS-2 का होता है,जिसमें राजनीति और शासन प्रणाली से प्रश्न होते हैं।यह भी 250 अंक का होता है।छठवाँ प्रश्न पत्र GS-3 का होता है, जिसमें अर्थ शास्त्र,टेक्नोलॉजी,पर्यावरण और आपदा प्रबंधन आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं।यह भी 250 अंक का होता है।और सातवाँ प्रश्न पत्र GS-4 का होता है,जिसमें नैतिकता,इंटीग्रिटी,केस स्टडी आदि से सम्बंधित प्रश्न होते हैं,यह भी 250 अंक का होता है।
इसके अलावा 500 अंक के,दो ऑप्शनल पेपर 250-250 अंक के होते हैं।अभ्यर्थी कुल 26 विषयों में से दो विषय चुनते हैं और इसकी परीक्षा देते हैं।
तीसरी परीक्षा साक्षात्कार की होती है,जो 275 अंक का होता है,जिसमें अभ्यर्थी के व्यक्तित्व,उसके निर्णय लेने की क्षमता,उसकी मानसिक स्थिति,उसके समस्याओं से निपटने की क्षमता का इससे आंकलन होता है।
इस प्रकार कुल 2025 अंकों की परीक्षा होती है,जिसके आधार पर फाइनल रिज़ल्ट जारी होता है।
अब अंत में उक्त परीक्षा की तैयारी के लिए कितना वक्त चाहिए तो साथियों लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना आसमान से तारे तोड़ने के ही समान है,क्योंकि यह हर समाज में सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है,जिसको पास करना अपने आप में एक प्रतिष्ठा होती है।तो आइये उसकी तैयारी के लिए एक मोटी मोटा अनुमान के अनुसार 14-18 महीने का वक्त चाहिए होता है।पहले 4 महीने हम सभी बेसिक यानि फाउंडेशन तैयार करने में लगाते हैं जिसमें NCERT की कक्षा 6-12 की पुस्तकों का गंभीरता के साथ अध्ययन करते हैं।इसके बाद 08 महीने दो ऑप्शनल पेपर्स के लिए स्टैण्डर्ड बुक्स का अध्ययन करने में लगाना पड़ता है और गहराई के साथ नोट्स बनाने होते हैं।यहाँ आप को मैं हिदायत देना चाहूँगा कि अनावश्यक पुस्तकों का ढेर ना लगाइये केवल और केवल प्रामाणिक पुस्तकों का ही अध्ययन करें और आयोग द्वारा पूर्व वर्षों के एक दशक के प्रश्न पत्रों को संज्ञान में लेकर तैयारी करें।इसके पश्चात् 02 माह रिवीजन हेतु समय सीमा देना पड़ता है।इसमें पूर्व में अध्ययन किए गए विषयों का रिवीजन करना होता है,तब जाकर आप अपने को उक्त परीक्षा हेतु तैयार कर पाते हैं।प्रत्येक अभ्यर्थी से यह अपेक्षा होती है कि आप” know something about every things and know everything about something”की योग्यता आप में होनी चाहिए।तैयारी हेतु 6-8 hours निरंतरता के साथ अध्ययन करना जरूरी होता है।यह नहीं की आज 10 घंटे पढ़े और अगले दिन कुछ नहीं।
आप अगर लोक सेवा आयोग या किसी राज्य सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं,तो अभी से करंट अफ़ेयर्स के लिए अच्छे अख़बार जिसमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया,इंडियन एक्सप्रेस,जनसत्ता या मासिक मैगज़ीन जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आती है,उसका नियमित अध्ययन करना शुरू करें और आलतू फालतू चीजों का अध्ययन न करें।उसमें आर्थिकविषय,पर्यावरण,टेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण सामयिक विषयों की जानकारी प्राप्त करें और उनका नोट्स बना लें।नियमित AIR news और BBC का समाचार सुनें और उसका हृदयंगम करें।रटने से बेहतर उसको मस्तिष्क में रखने का अभ्यास करें।अंतःकरण को निर्मल बनाने और अपने आत्म विश्वास के साथ अध्ययन करें।आशा और विश्वास रखें कि एक दिन आप अवश्य सफल होंगे। एक कवि आप सभी एस्पायरेंट्स को ध्यान में रखकर लिखा है कि-
“माना अगम अगाध सिंधु है, संघर्षों का पार नहीं।
किन्तु डूबना मझधारों में,साहस को स्वीकार नहीं।।”

सभी अभ्यर्थियों की सफलता की शुभ कामना के साथ…..

डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा,पूर्व जिला विकास अधिकारी(उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित) बी.एस-सी(ऑनर्स) एम ए(समाज शास्त्र) एम एड.,पी-एच.डी (शिक्षा शास्त्र) अतिरिक्त योग्यता-इण्टर टेक्निकल ड्राइंग, इंटरमीडिएट बुक क्राफ्ट, इण्टर ग्रेड ड्राइंग परीक्षा (महाराष्ट्र राज्य) सभी प्रथम श्रेणी A ग्रेड के साथ, कई पुस्तकों का प्रणयनकर्ता, कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित, वरिष्ठ साहित्यकार,वार्ताकार, ऑल इंडिया रेडियो का नियमित वार्ताकार, मोटिवेशनल स्पीकर जिसके नाम से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के शोध छात्रों को डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा बेस्ट पेपर अवार्ड भी दिया जाता है।शिक्षाविद् और प्रथम श्रेणी का पूर्व अधिकारी।

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