माँ चंद्रघंटा - ( तीसरा स्वरूप )

माँ चंद्रघंटा - ( तीसरा स्वरूप ) 
माँ दुर्गा को प्रिय भक्तों का, 
स्वीकार हो कोटिशः प्रणाम। 
सत्यानंद स्वरूपिणी माँ तेरे, 
चंद्रघंटा तीसरी शक्ति का नाम। 

सर्वमंगलमयी माँ की अपार कृपा, 
अलौकिकता के हों नित दर्शन। 
परम भक्त तो श्रवण भी करते, 
अदृश्य,दिव्य ध्वनियों का नर्तन। 

मस्तक विराजित घंटा अर्धचंद्राकार, 
स्वरूप माँ का बड़ा कल्याणकारी। 
नाम पड़ा इसलिए देवी चंद्रघंटा, 
रंग स्वर्ण जैसा चमकीला चमत्कारी। 

दस भुजाओं में सुशोभित माँ के, 
अस्त्र ,शस्त्र ,खड्ग वाण। 
वाहन सिंह अपनी  माता रानी का,
युद्ध हेतु उद्यत मिले भक्तों को त्राण। 

दूर होते साधक के समस्त पाप, 
नष्ट होती उनकी समस्त भव बाधाएं। 
आराधना अवश्य होती फलदायी, 
पूर्ण होती साधकों की प्रत्येकआशाएं। 

माँ का यह स्वरूप शांति से परिपूर्ण, 
भक्तों को माता का मिलेआशीर्वाद। 
रक्षा कीजिए माँ आज पूरे जगत की, 
पूर्ण हों भक्तों के पुनीत फरियाद। 

कवि - चंद्रकांत पांडेय, 
मुंबई / महाराष्ट्र 

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