रंगों की दुनिया; जीवंत, ख़ुशनुमा और भावनात्मक भी, एक अनुशीलन : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा

रंगों की दुनिया; जीवंत, ख़ुशनुमा और भावनात्मक भी, एक अनुशीलन : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा 
रंग हमारे जीवन को अर्थ, सौन्दर्य और खुशी प्रदान करते हैं। प्रकृति के रंग हरी घास,नीला आसमान और रंग बिरंगे फूल, दुनियाँ को मनमोहक बनाते हैं। कहते हैं कि रंग और तरंग से ही सृष्टि चलती है। रंगों का इतिहास लगभग 40000 वर्ष पुराना है,जब मानव ने मिट्टी, चारकोल और विभिन्न खनिजों से चाक, गेरू, लाल,पीले, काले, सफेद रंग बनाए। दुनिया का पहला ज्ञात रंग हल्का गुलाबी माना जाता है जो समुन्द्र में 50 करोड़ वर्ष पूर्व मिला था। विकास के साथ प्राकृतिक रंग जैसे पौधों कीड़ों से लेकर कृत्रिम रसायनों तक रंगों का सफ़र बदलता रहा है।
रंग सिद्धांत-इस सिद्धांत के अनुसार प्राथमिक रंग जिसे मूल रंग कहते हैं जो किसी अन्य रंग के मिलाने से नहीं बनते। उदाहरण लाल पीला नीला प्राथमिक रंग कहलाते है। इसे मौलिक रंग भी कहते हैं। द्वितीयक रंग वे होते हैं जो दो प्राथमिक रंगों के मिश्रण से तैयार होते हैं। जैसे-  
नारंगी (लाल+पीला) 
हरा (नीला+पीला) 
बैंगनी (लाल+नीला)। 
तृतीयक रंग एक प्राथमिक व एक द्वितीयक रंगों के मिश्रण से बनते हैं।तृतीयक रंग को मध्यवर्ती रंग भी कहते हैं। तृतीयक रंग वास्तव में द्वितीयक रंगों के ही विभिन्न रूप होते हैं। द्वितीयक रंगों को अलग अलग अनुपात में मिलाकर रंगों की एक विस्तृत श्रृंखला प्राप्त की जा सकती है जिसे हम तृतीयक रंग कहते हैं। किसी शुद्ध रंग में सफेद रंग मिलाकर उसे हल्का फीका बनाने को टिण्ट और काला मिलाकर गहरा बनाने को शेड कहते हैं।
प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रंग महंगे होते हैं। औद्योगिक क्रान्ति के बाद तो अनेक रंगों की खोज ने मानों क्रान्ति ही ला दी है। रंगों की दुनियाँ हमारे जीवन को रंगीन और आकर्षक बनाते हैं। वास्तव में दुनियाँ यदि रंगीन न होती तो हमारा जीवन भी बड़ा कठिन होता।रंगों और वर्णों से ही दुनिया प्यारी लगती है।रंग ही दुनिया के सौन्दर्य का आधार हैं। रंगों के बिना जीवन प्राणहीन और नीरस हो ता है।मित्रों रंगों की दुनियाँ इतनी विशाल है कि इस पर ग्रन्थ भी लिखे जा सकते हैं।
रंगों का विज्ञान प्रकाश, पदार्थ और मानवीय दृष्टि के बीच की अंतःक्रिया है। रंग स्वम् प्रकाश का एक गुण है,जो आखों द्वारा महसूस किया जाता है।जब प्रकाश किसी वस्तु से टकराकर परिवर्तित होता है तो आँखें उस तरंगधैर्य को रंग के रूप में देखती हैं।इसके मुख्य तत्व RGB और CMYK और मानव मस्तिष्क की दृष्टि प्रक्रिया है। आइये RGB और CMYK को विस्तार से समझें। रंगों के दो मॉडल है।रंगों को दिखाने और बनाने के लिए दो मुख्य तरीके हैं।RGB (प्रकाश) के लिए और CMY/CMYK(रंग-लेप/छपाई के लिए।दोनों का काम एक दूसरे के उलट है। RGB योगात्मक रंग मॉडल है जिसमें Red, Green, Blue स्क्रीन, मोबाइल, टीवी, लैपटॉप, कैमरा में इस्तेमाल होता है। इसे अधेरे से शुरू करते और तीन रंगीन रोशनियाँ लाल हरा नीला मिलाते हैं तो रंग बनते हैं। जैसे लाल +हरा =पीला, हरा+नीला =सियान (आसमानी) नीला +लाल =मैजेंटा (गुलाबी-बैगनी) लाल +हरा +नीला=सफेद और जब कुछ नहीं तो काला। इसे योगात्मक रंग मॉडल कहते हैं।CMY/CMYK इसे घटावात्मक रंग मॉडल कहते हैं।सियान मेजेंटा येलो और के (ब्लैक) यह अखबार किताब पोस्टर फोटो प्रिण्ट में इस्तेमाल होते हैं। दोनों रंग मॉडल एक दूसरे के पूरक होते हैं।RGB-CMY के द्वितीयक। CMY के प्राथमिक RGB के द्वितीयक होते हैं।जैसे मेजेंटा +येलो =Red, सियान+मेजेंटा=Blue, Yellow+Cyan=Green, Cyan+majenta+Yellow=Deep gray 
रंग विशेषकर इन्द्र धनुष के सात रंग जिसे संक्षेप में (बहन आप लाना)कहते हैं।ब-बैंगनी ह-हरा न-नीला आ-आसमानी प-पीला ला-लाल ना-नारंगी जो प्रकृति और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। रंग हमारे भावों और निर्णयों को हमारी सोच से कहीं अधिक प्रभावित करते हैं।रंग मनोदशा,रचनात्मकता और प्रदर्शन को भी प्रभावित करते हैं जिससे व्यवसायी हुनरमंद शिक्षक कलाकार और डिज़ाइनर को बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलती है जो विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को पसंद आते हैं।लाल रंग जहाँ भारत और चीन में सौभाग्य और दुल्हन का रंग माना जाता है वहीं पश्चिमी देशों में इसे प्रेम के प्रतीक के साथ साथ वेश्यावृति से भी जोड़ कर देखा जाता है।
लाल रंग जोश उत्साह जगाता है तो नीला शांति का तो पीला उमंग और ख़ुशी पैदा करता है।हरा रंग हमारे मन को बहुत आकर्षित करता है।प्राकृतिक रंगों को देखकर हमारी आत्मा प्रफुल्लित होती है।रंग हमे उत्तेजित करते हैं,तो कई रंग हमे प्रेम करने को प्रेरित करते हैं।प्रकृति में सुन्दर सुंदर रंग नहीं होते तो दुनियाँ इतनी मनमोहक नहीं होती।कुछ रंग हमे शांति प्रदान करते हैं तो कुछ सुख का एहसास कराते हैं।चित्रकार की कला रंगों के बिना अधूरी होती है।रंगों के बिना तो कला का अस्तित्व ही बेजान होता है।रंग केवल चित्रकला के लिए ही नहीं जरूरी होते बल्कि इनका प्रयोग विभिन्न व्यवसायों,मार्केटिंग,ब्रांडिंग,ग्राफिक डिज़ाइन,इंटीरियर डिज़ाइन,पेंटिंग,विज्ञापन के साथ साथ चिकित्सा में भी किया जाता है।विज्ञापन की दुनिया तो रंगों के बिना सुनी होती है।इसके अलावा चमकदार कलाकृतियाँ बनाने चमड़े को रंगने इत्यादि व्यवसायों में इनका इस्तेमाल अत्यधिक किया जाता है।कुछ खाद्य पदार्थों को रंगीन बनाने में भी रंगों का बहुतायत प्रयोग किया जाता है।रंग हमारे रोजमर्रा के काम में प्रयोग किए जाते हैं;इसलिए इन पर चिंतन करना स्वाभाविक है।
रंगों के प्रभाव हमारे मन और शरीर पर पड़ता है,जो हमारे व्यवहार व भावनाओं को प्रभावित करता है।रंग हमारे जीवन में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रभाव पैदा करते हैं।आज रंगों को ध्यान में रख कर सप्ताह के दिनों में कपड़े भी पहनें जाने लगे हैं।जैसे सोमवार-को सफेद,चमकीला,सिल्वर,पीच,बेबी पिंक,क्रीम आसमानी और हल्का पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है जो मानसिक शांति और समृद्धि को बढ़ावा देता है।
मंगलवार-भगवा गुलाबी संतरा पीला सिंदूरी चेरी रेड या लाल जैसे रंग के कपड़े पहनना अच्छा होता है।यह साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।बुधवार-हरे रंग या हरे रंग से मिलता जुलता रंग का कपड़ा पहनना शुभ माना जाता है जो बुद्धि और व्यापार के वृद्धि को बढ़ावा देता है।गुरुवार-पीला नारंगी गुलाबी पर्पल सुनहरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।इससे ज्ञान और समृद्धि में वृद्धि होती है।शनिवार-काला नेवी ब्लू स्काई ब्लू भूरा जामुनी रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।यह साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।रविवार-नारंगी सुनहला गुलाबी संतरी रंग लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।यह ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
रंगों के मनोविज्ञान के अनुसार रंग विशिष्ट मानसिक स्थितियों और भावनाओं को जागृत करते हैं।जैसे लाल रंग ऊर्जा जुनून शक्ति को बढ़ाता है और ध्यान आकर्षित करता है यह हृदय गति को भी बढ़ाता है।यह गुस्से और तीव्र भावनाओं को दर्शाता है।नीला रंग शांति स्थिरता विश्वास और बुद्धिमत्ता का प्रतीक होता है।यह मन को शांत और तनाव को कम करता है।यह एकाग्रता को बढ़ाने वाला माना जाता है।पीला यह खुशी आशावाद बुद्धिमत्ता और ऊर्जा का रंग है।यह मनोदशा को बेहतर बनाता है और सकारात्मक ऊर्जा का द्योतक माना जाता है।हिन्दू परम्परा में यह मंगल कार्यों में प्रयोग होता है।हरा रंग यह प्रकृति विकास स्वास्थ्य शांति और धन से जुड़ा माना जाता है और आखों को शुकून देने वाला माना गया है।नारंगी यह रंग उत्साह सफलता और रचनात्मकता का रंग है जो ऊर्जा और प्रसन्नता को दर्शाता है,यह चंचलता का भी प्रतीक माना गया है।बैंगनी यह विलासिता रॉयल्टी आध्यात्मिकता और रहस्य से जुड़ा रंग माना गया है।यह रवचनात्मकता को भी बढ़ाने वाला माना जाता है।सफेद रंग तटस्थ रंग माना गया है।यह पवित्रता स्वच्छता शांति और सादगी का प्रतीक है।काला रंग भी तटस्थ यह लालित्य,रहस्य और गंभीरता का प्रतीक माना जाता है।इसका प्रयोग कुछ विशेष तंत्र साधना में किया जाता है।गुलाबी रंग प्रेम कोमलता देखभाल और स्त्रीत्व से जुड़ा माना जाता है।कुछ रंग गर्म प्रभाव पैदा करते हैं जैसे लाल पीला और कुछ ठंडक के कारक होते हैं जैसे हरा नीला ये शांति दायक भी माने जाते हैं।शोधों से पता चला है कि लाल रंग हृदय गति बढ़ा सकता है और प्रभुत्व का संकेत देता है।वहीं नीला रंग शांत प्रभाव डालता है और तनाव को भी कम करता है।
ज्योतिष में सही रंग किस्मत को मजबूत और नकारात्मक रंग भाग्य को कमजोर करने वाले माने जाते हैं।
लेखक:कई पुस्तकों के प्रणयन कर्ता कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित,वरिष्ठ साहित्यकार,शिक्षाविद एवं प्रमुख वार्ताकार हैं।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने