वैदिक युग से वर्तमान युग तक नारी की स्थिति का संक्षिप्त विवेचन:अब डिजीटलीकरण से महिला सशक्तिकरण कैसे : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा

वैदिक युग से वर्तमान युग तक नारी की स्थिति का संक्षिप्त विवेचन:अब डिजीटलीकरण से महिला सशक्तिकरण कैसे : डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा 
मित्रों! महिलाएं सदा से साहस, वीरता, प्रतिभा और समर्पण सेवा में, अग्रणीय रहीं हैं। स्त्रियां माँ, बेटी, बहू तथा पत्नी के रूप में समाज में अपनी अहमियत क़ायम कर चुकी हैं।
 महाभारत शांति पर्व में वर्णित है कि-

न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिनी गृहमुच्यते।
गृहं तु गृहिणीहीनम् अरण्यम् सदृश्यम् मतम्।।
गृह केवल भवन मात्र नहीं होता,बल्कि गृहणी के कारण,वह घर होता है।स्त्रियां ही परिवार को संगठित रखती हैं और प्रेम,स्नेह,समर्पण से घर को,वास्तविक रूप से घर बनाती हैं।गृहणी के बिना,घर जंगल के समान(शून्य और निर्जीव)माना जाता है।
आम जन मानस में भी एक कहावत प्रचलित है कि”बिन घरनी घर भूत का डेरा”यानि बिना घरवाली के, घर भूतों का डेरा होता है।
बारहमिहिर ने तो नारी को सर्वश्रेष्ठ रत्न की संज्ञा दी है।मनु महाराज ने तो यहाँ तक लिख दिया है कि- 
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”यानि जहाँ नारियों की पूजा होती है,वहाँ देवताओं का वास होता है,और जहाँ नहीं होती वहाँ सब कार्य असफल हो जाते हैं।
वास्तव में, वैदिक काल में स्त्रियों की दशा उन्नत थी,उन्हें शिक्षा,विवाह और धार्मिक कार्यों में पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे।इसीकारण उन्हें सहधर्मिणी,अर्घांगिनी का दर्जा प्राप्त था। वे ब्रह्मवादिनी भी हुआ करती थीं। जिसका मतलब आजीवन शिक्षार्थी होना था।उन्हें स्वम् वर चुनने का भी अधिकार था। पर्दा प्रथा नहीं था।तत्समय स्त्रियां धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेती थीं और यज्ञों में मंत्र उच्चारण करती थीं।शास्त्रार्थ भी करती थी उदाहरणार्थ-गार्गी, मैत्रेयी,अपाला,घोषा,लोपामुद्रा इत्यादि विदुषी स्त्रियों से पौराणिक आख्यान भरे पड़े हैं।
इसके बाद उत्तर वैदिक काल आया; जिसमें स्त्रियों की दशा में गिरावट आने लगी उनके अधिकारों को सीमित किया जाने लगा,उन्हें सभा-समितियों में जाने से मनाही होने लगी।उन्हें संपत्ति के अधिकार से वंचित किया गया और पितृसत्तात्मक समाज के कारण उनकी गरिमा धीरे-धीरे समाप्त हो गई।नारियों की स्थिति इस समय में परतन्त्र,पराधीन, निस्सहाय,निर्बल सी बन गई।शिक्षा की कमी के कारण, बाल विवाह का प्रचलन शुरू हो गया।बहु पत्नी विवाह की नौबत आ गयी।मुग़ल काल में तो पर्दा प्रथा और स्त्रियों को ग़ुलाम बनाकर रखने की परंपरा शुरू हो गयी;फलस्वरूप महिलाओं की दशा दयनीय हो गयी।
आधुनिक काल एवं ब्रिटिश काल में 19-20वीं सदी में स्त्रियों की की दशा को सुधारने के लिए राजाराम मोहन राय,ईश्वरचंद विद्यासागर और तमाम समाजसुधारकों ने सती प्रथा,बाल विवाह को समाप्त करने का संघर्ष किया और विधवा पुनर्विवाह को मान्यता प्रदान की;जिससे स्त्रियों की स्थिति में सुधार आना शुरू हुआ।
स्वतंत्रता और संविधान से आज अब महिलाओं को पुरुषों के समान वोट देने का अधिकार,शिक्षा और सम्पत्ति में अधिकार प्राप्त हुआ।फल स्वरूप आज की नारी सेना,राजनीति, अंतरिक्ष और कॉरपोरेट जगत में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं।
आज अंकीय भारत,डिजिटल इंडिया,ई क्रान्ति और प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के डिजिटलीकरण से अब तक 10 वर्षों में हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन और डिजिटल लेन देन को बढ़ावा मिला है;जिससे आम महिलाओं के जीवन में ईज़ ऑफ़ लिविंग और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को सम्पादित करने का अवसर मिला है।जिसमें स्टार्ट अप इंडिया,स्टैण्ड अप इंडिया,ऑन लाइन मार्केटिंग,ऑन लाइन हेल्थ सर्विसेज,ऑन लाइन एजुकेशन, डिजिटल मीडिया,सोशल मीडिया,डिजिटल पेमेण्ट जैसे BHIM APP, UPI, AEPS(आधार सक्षम भुगतान) डिजिटल उद्यमिताविकास,डिजिटल ट्रेनिंग प्रोग्राम आदि से आज महिला बहनों और उद्यमियों को आर्थिक विकास के सुअवसर प्राप्त हुए हैं।नागरिकों को एक ही एप पर कहीं भी कभी भी सरकारी सेवाओं का लाभ देकर उनके जीवन को आसान बनाने में, डिजिटलीकरण मील का पत्थर साबित हुआ है।जैसे-UMANG जिसे हिन्दी में यूनिफाइड मोबाइल एप्लीकेशन फॉर न्यू ऐज गवर्नेन्स जो भारत सरकार का एक एकीकृत सुरक्षित और बहुभाषी मोबाइल एप है जो केन्द्र और राज्यों की 2000 से अधिक सरकारी सेवाओं को एक ही मंच प्रदान करता है,इससे भौतिक फ़ाइलों को खोजने की जरूरत ख़त्म होती है,स्थान की बचत और डेटा का त्वरित आदान प्रदान भी होता है,जो सरकारी कार्यों को सरल,तेज, और सुलभ बनाता है;जिससे आम लोग-आधार,एम-गवर्नेंस से आधार अपडेट करने की सुविधा प्राप्त करने में सक्षम हो जाते हैं।ईपीएफ़ओ(पीएफ)चेक करने की सुविधा,पैन,गैस बुकिंग,पेंशन,पास पोर्ट सेवा के लिए,एक्सेस करने की सुविधा भी यह ऐप देता है।भारत सरकार द्वारा शुरू की गई डीजी लॉकर ऐप एक सुरक्षित cloud based service है जो आधार कार्ड,पैन कार्ड,ड्राइविंग लाइसेंस,वाहनों के आरसी,बीमा पालिसी,कास्ट सर्टिफिकेट,शेयर व म्यूचुअल फंड विवरण,आय प्रमाण पत्र,दसवीं-बारहवीं से,लगायत ग्रेजुएशन तक के सर्टिफिकेट्स और सरकारी दस्तावेज़ को डिजिटल रूप में 1 GB तक सहेजने में मदद मिली हैं, और इसे कहीं भी कभी भी एक्सेक्स करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। यह सुविधा पूरी तरह से परसनल यूज़ के लिए क़ानूनी रूप से मान्यता प्राप्त सुविधा है; जिससे जनमानस अपने मूल्यवान कागजात और प्रमाण पत्रों को इस प्लेटफॉर्म पर ई-साइन करके अपलोड कर सकता है और कहीं भी दिखा सकता है।प्रस्तुत करने में सहायता प्राप्त कर सकता है।भारत नेट से ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराया गया है जिससे ग्राम पंचायतों में भी डिजिटलीकरण से उन्हें समुन्नत किया गया है।ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट को पहुंचाकर महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश की गईहै।डीजी लॉकर में रखे वाहन आरसी से आज डॉक्यूमेंट को ढोने से मुक्ति मिली है।
जैसे-यदि कोई ट्रैफ़िक पुलिस आप से आप के वाहन की आरसी माँगता है तो आप डीजी लॉकर से उक्त दस्तावेज को उसे दिखा सकते हैं,यह क़ानूनी रूप से मान्य भी है।
ई हॉट द्वारा महिला बहनों को अपने व्यवसाय को चलाने का घर बैठे भी अवसर मिला है जिससे आज बहुत सारी महिलाएं अपने उत्पाद की मार्केटिंग करके घर बैठे आर्थिक लाभ प्राप्त करने में सक्षम हुई हैं।
उपर्युक्त विवेचन से अब स्पष्ट हो चुका है कि भारत सरकार और राज्य सरकारों का डिजिटलीकरण अभियान आज महिलाओं के सशक्तिकरण में आशातीत सफलता हासिल की है।


लेखक : प्रथम श्रेणी का पूर्व अधिकारी,कई पुस्तकों का प्रणयनकर्ता, कई सम्मानों से विभूषित, वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद और मुख्य प्रशिक्षक हैं।

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