चकिया के लाल डॉ. सत्य प्रकाश ने खोटे सिक्के को नई पहचान दिलाई
बीएचयू, वाराणसी :
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पद पर रहते हुए समाज के बीच अपने वक्तव्य और विचारधारा से उपजे नवीन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से डॉ. सत्य प्रकाश प्रासंगिकता प्राप्त कर चुके हैं। चकिया तहसील ग्राम बिहाशर ब्राह्मण परिवार में जन्मे डॉ. सत्य प्रकाश के पिता स्वर्गीय उदय नारायण पांडेय जी एक इंटर कॉलेज के अध्यापक होते हुए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई। डॉक्टर सत्य प्रकाश जी पूरी क्वालिफिकेशन करने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पी एचडी करके, चिकित्सा विज्ञान संस्थान में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत 2008 से हो गए और उनके कार्यों को देखते हुए प्रोफेसर जीपी दुबे ने अनेकों पेटेंट दवावों की किये कराए, जबकि ऐसा लगता था कि इसमें कुछ भी तत्व नहीं है, डॉ.सत्य प्रकाश का मानना है कि जिस भावना से प्रोफेसर जी पी दुबे और राणा गोपाल सिंह ने एक नेशनल फैसिलिटी ट्राइबल मेडिसिन को ऊपर लाने के लिए स्थापित की विश्वविद्यालय को भी उसकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए ट्राईबल्स मेडिसिन के ऊपर की जाने वाले सारे कार्यों को पुनः ठीक से सुचारू रूप से चलायमान करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी चाहिए।
चिकित्सा विज्ञानं संस्थान का एक खोटा सिक्का जैसा एनएफटीएचम NFTHM, निश्चित ही एक दिन विश्वविद्यालय को सम्मानजनक उपलब्धि महसूस करवाने में सफल होगा।
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संपादकीय/ बीएचयू