नशे की दलदल में, फँसते सर्व समाज के युवा : डॉ डी आर विश्वकर्मा

नशे की दलदल में, फँसते सर्व समाज के युवा : डॉक्टर डी आर विश्वकर्मा 

(अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर विशेष) 
मित्रों ! 
नशा को नाश का जड़ माना जाता है।इससे व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक,सामाजिक और आर्थिक नुकसान तो होता ही है ;नशा करने वाले व्यक्ति के परिवार और बाल बच्चों पर इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।नशे की लत से परिवार के परिवार उजड़ जाते हैं।गरुण पुराण में वर्णित है कि नशा करने वालो को अगले जन्म में पिचाश योनि प्राप्त होती है।
आइए!जानें कि नशा होता क्या है? मादक द्रव्यों से उत्पन्न होने वाली दशा;जिससे मस्तिष्क क्षुब्ध और उत्तेजित हो जाता है,स्मृति या धारणा कम होने की दशा को नशा कहते हैं।
नशा एक ऐसी स्थिति है,जिसमें व्यक्ति किसी पदार्थ या गतिविधि के प्रति अत्यधिक आकर्षित होता है,जिसमें पान,तम्बाकू,बीड़ी,सिगरेट, गुटका या जुआ व अन्य बुरी आदतें जैसे पोर्नोग्राफी,सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग आदि आदि हो सकती हैं।
नशा दो तरह से होता है पहला नशीले पदार्थों के सेवन से और दूसरा व्यवहारिक नशा जिसे लत भी कहते हैं।कहते हैं कि लत का कोई इलाज नहीं होता केवल इसे मजबूत मन मजबूत इरादे और आत्म विश्वास बढ़ाकर दूर किया जा सकता है।नशीले पदार्थों में ड्रग्स, शराब, अफीम, चरस, हेरोइन, स्नैक, ब्राउन शुगर,      कैनबिस (मारिजुआना) ए टी एस, एल एस डी, निकोटीन, कोकीन रिटालीन, गुटका, पान, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का इत्यादि चीजे आती हैं।व्यवहारिक नशा में अश्लील फ़िल्म देखना, पोर्नोग्राफी, सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग आदि।
”नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट “एम्स की 2019 की रिपोर्ट बताती है कि अकेले भारत में 16 करोड़ लोग शराब का नशा करते हैं, जिसमें अपने देश की 1.5 करोड़ महिलायें भी शामिल हैं। नशा करने वालों में देश की 20%आबादी संलिप्त है;जिसमें 10 वर्ष से लेकर 75 वर्ष के लोग सम्मलित हैं। ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज स्टडी 2017 के आंकड़े के अनुसार दुनियाँ भर में लगभग 7.5 लाख लोगों की मौत अवैध ड्रग्स के सेवन से और 33 लाख लोगों की मौत केवल नुक़सान दायक अल्कोहल से हो रही है।फ़रवरी 2019 में NDDT (नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट) की एम्स की आई रिपोर्ट में लोग निम्नांकित प्रकार का नशा करते हैं।
सूंघने वाला नशा— 0.7%
नशीली दवाओं का सेवन करने वाले-1.8%
अफ़ीम लेने वाले- 2.1%
गांजा पीने वाले- 2.8%
शराब पीने वाले- 14.6%
इसके अलावा पूरी दुनियाँ में 1.1 करोड़ लोग इंजेक्शन से भी नशा करते हैं ।
“ड्रगवार डिस्टॉर्शन एण्ड वार्डोमीटर” की रिपोर्ट के अनुसार आज दुनियाँ में 30 लाख करोड़ का नशे का कारोबार हो रहा है।
नशा से निम्नांकित चीजें व्यक्ति या सेवन करने वालों के शरीर में उत्पन्न होती हैं। साथियों लगभग 100 प्रकार की न्यूरो ट्रांसमीटर होते हैं जो व्यक्ति के मस्तिष्क में तरह तरह की भूमिकाएं निभाते हैं। सेरोटोनिन और डोपामाइन चेतना,अनुभूति, ध्यान और भावना को नियंत्रित करते हैं।
नशा तंत्रिका तंत्र के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है, इससे शारीरिक मानसिक और व्यावहारिक लक्षण उत्पन्न होते हैं। नशा से मानसिक और व्यवहारिक लक्षण और समस्याएं जो होती हैं; उसका विस्तार पूर्वक वर्णन मैं यहाँ करने जा रहा हूँ, जिस पर आप सभी का ध्यान अपेक्षित है । सर्वप्रथम जो मानसिक लक्षण नशे का दिखाई देता है उसमें आक्रामकता, घबराहट,चिंता, चेतना के स्तर में कमी जैसे उनींदापन अथवा सुस्ती, उल्लास, मतिभ्रम, भ्रष्ट आचरण, व्यामोह, जोखिम उठाने वाले व्यवहार इत्यादि होते हैं।
व्यावहारिक लक्षण में संतुलन समन्वय की समस्या जैसे लड़खड़ाना ,धुंधली दृष्टि, हाइपर व हाइपो थर्मिया, पुतलियों में संकुचन, प्लावित चेहरा, हृदय गति में परिवर्तन जिसे टैकी कार्डिया कहते हैं, उच्च निम्न रक्त चाप की समस्या, उल्टी दौरे सांस लेने में कठिनाई,अस्पष्ट भाषण,नीला होंठ और त्वचा जिसे साईनोसिस कहते हैं,उत्पन्न हो जाता है।
नशा करने के कारणों पर यदि विचार करें तो इसमें सामाजिक दबाव के कारण लोग नशा करते हैं, मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण तनाव,चिंता और अवसाद के कारण भी लोग नशे का सेवन करते हैं।आर्थिक समस्याएँ जैसे गरीबी ,बेरोजगारी भी नशा का कारण बनता है। पारिवारिक समस्याओं जैसे तलाक एवं किसी प्रमुख व्यक्ति की मृत्यु के कारण भी लोग नशा का सेवन करने लगते हैं।
नशा मुक्ति अभियान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में 15 अगस्त से संचालित किया गया है, जिसे NMBA नशा मुक्त भारत अभियान कहा गया है । जिसमें मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम, जन शिक्षा और संवेदीकरण, सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण, शैक्षिक संस्थाओं के साथ सकारात्मक साझेदारी ,नशे की लत के लिए उपचार, पुनर्वास और परामर्श सुविधाओं का विस्तार, सार्वजनिक सूचना व सामुदायिक जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमाण्ड रिडक्शन जिसे NAPDDR कहते हैं  ,जिसके अन्तर्गत मद्यनिषेध विभाग द्वारा भी जनपदों में युवाओं में बढ़ती ड्रग की लत को कम करने हेतु कार्यक्रम चलाये जा रहें हैं।
नशा मुक्ति के उपाय में सर्वप्रथम युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाय,जिसमें खेलकूद,राष्ट्र निर्माण की गतिविधि से जोड़ना,स्कूल,कॉलेज,विश्वविद्यालय में NCC, NSS, Red cross की गतिविधियों को बढ़ावा देना, जिससे 
युवाओं में आत्मविश्वास,देश भक्ति की भावना जागृत हो और उनका भविष्य सकारात्मक बने।
नशे की लत से बचाव के तरीको में सर्वप्रथम नशा करने वाले को अपने लत को स्वीकार करना। नशा करने वाले व्यक्ति को दृढ़ इच्छा शक्ति से प्रण करना होगा कि हमें नशा से मुक्त होना है। नशे से दूर रहने के लिए चिकित्सकीय परामर्श और उपचार लेना होगा और व्यक्ति के परिवार और मित्रों से नशा को छुड़ाने के लिए समर्थन प्राप्त करना। सामाजिक गतिविधियों में बराबर भाग लेकर अपने तनाव और अवसाद को कम किया जा सकता है।
कुछ महत्वपूर्ण बातों में नशा छुड़ाने हेतु अच्छे मित्रों का चयन करना,बुरी संगत से तौबा करना, शाकाहारी भोजन करने की आदत, चित्त को शांत रखने के लिए सुबह शाम टहलना, योग प्राणायाम ध्यान को नियमित करना।
अंत में यदि कोई व्यक्ति कुछ नशे की वस्तु लेता है तो उसे छोड़ने के लिए उसके स्थान पर एक वैकल्पिक आदत और कुछ अच्छी वस्तु को अपनाना पड़ेगा;जैसे यदि हम तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं तो उसे छोड़ने की दृढ़ इच्छा शक्ति बनाकर उसके स्थान पर सौंप या इलायची लेना चाहिए जिससे गुटका खाना बंद हो जाएगा। इसी तरह यदि आप को कोई खराब आदत है तो उसके स्थान पर स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाकर ख़राब आदतों को अलविदा किया जा सकता है।

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