मोबाइल क्रांति, कभी डिजिटल स्वर्ग, अब डिजिटल एडिक्शन (लत) : एक अनुशीलन , डॉक्टर दयाराम विश्वकर्मा
मोबाइल फ़ोन की खोज,अमेरिका वासी,मार्टिन कूपर,जो मेटोरोला कम्पनी के इंजीनियर थे,ने 3अप्रेल,1973 को, किया था।उन्होंने अपने मित्र जोएल को,न्यूयॉर्क की सड़क पर पहला फ़ोन किया था।अपने मित्र से कहा-I am calling you from a cell phone,a real handheld portable cell phone.उस सेल फ़ोन का नाम था Motorola DynaTac 8000X जिसका वजन 1 Kg(2.5 Pound)था।उस प्रारम्भिक सेल फ़ोन की कीमत 10 लाख थी।आधे घंटे बात करने के लिए,बैटरी को चार्ज करने में 10 घण्टे लगते थे,परन्तु आज ऐसा नहीं है।
वास्तव में,मोबाइल फ़ोन,विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार है,जो आज हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।मोबाइल फ़ोन ने आज हम सबकी नींद,एकाग्रता सामाजिक लगाव,व्यक्तिक डेटा,मानसिक सक्रियता और स्वास्थ्य,निजता,सिनेमा,टेलीफ़ोन,घड़ी,कैलकुलेटर,कैमरा,टॉर्च,रेडियो,डायरी,चिट्ठी पत्री,दोस्तों की महफ़िल,गली मुहल्लों के खेल,आमने सामने की बातचीत के दौरान की आत्मीयता, पारिवारिक समय, रिश्तों की मिठास, फ़ुर्शत व शांति,दादा नानी की कहानियाँ, हाथ में लेकर पढ़ने वाले अख़बार इत्यादि को, हमसे छीन लिया और दिया है आसान संचार, तमाम जानकारी, ऑन लाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग भुगतान, नेविगेशन, उच्च गुणवत्ता के फ़ोटो कैमरे, बेहतरीन जुड़ाव सम्पर्क , मनोरंजन, उत्पादकता, आपातकालीन परिस्थियों में मदद व समय प्रबंधन हेतु अलार्म, कैलेंडर, रिमाइंडर आदि।यह पोर्टेबल यंत्र तत्काल संचार, इंटरनेट एक्सेस, डिजीटल पेमेण्ट, नेविगेशन, डॉक्टरों से घर बैठे परामर्श, घर बैठे FIR, घर बैठे विशेषज्ञों की सलाह की सुविधा देकर लोगों के जीवन को काफ़ी प्रभावित किया है।इससे वॉइस कॉल,वीडियो चैट,टेक्स मैसेज,व्हाट्स एप मेसेज वीडियो भेजना आसान हुआ है। आज मोबाइल की मदद से, ज्ञान का असीमित स्रोत हमेशा और कहीं भी उपलब्ध होता है।इसीलिए लोग कहते हैं कि आज दुनियाँ लोगों की मुट्ठी में आ चुकी है।कहने का मतलब आज कहीं की सूचना दृश्य सहित, कहीं भी, चंद क्षणों में इसकी मदद से पहुँचाई जा सकती है। वो भी बिना किसी गति व गतिविधि के। मोबाइल फ़ोन के सन्दर्भ में आज हमारे मनीषी भगवद् गीता के एक श्लोक के साथ उसके कुप्रभाव को भी दर्शाते हैं-
इंद्रियाणाम हि चरतां, यन्मनो नु विधीयते।
तदस्य हरति प्रज्ञाम, वायुर्नावमिवाम्भसी ।।
कहने का तात्पर्य कि जैसे- हवा नाव को भटका देती है, वैसे ही इंद्रियाँ मन को भटका कर बुद्धि को हर लेती हैं; ठीक वैसे ही आज मोबाइल हम सभी और बच्चों के मन को भटकाकर बुद्धि को हर लिया है। आज हम सभी मोबाइल के गुलाम बन चुके हैं। यदि हम रोज 04 घण्टे मोबाइल चलाने में समय ख़र्च कर रहे हैं तो समझे साल में 60 दिन, और पाँच वर्ष में जीवन के 10 माह ज़िन्दगी के केवल स्क्रीन देखने में लगा दे रहें हैं। अब तो आज लोग 7-7 घण्टे मोबाइल चलाने में लगा देते हैं। तो जरा हिसाब लगाइए हम अपने जीवन के कितने घण्टों को स्क्रीन देखने में लगा रहे हैं।
अब आइये कुछ शोधों के सार जो समय समय पर मोबाइल गतिविधियों और उसके पड़ने वाले प्रभावों पर किए गए हैं की जानकारी प्राप्त करते हैं। बच्चों के विकास में स्मार्ट फ़ोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरण बाधक बनते हैं।
बच्चों के दिमाग का 80% विकास 0-3 वर्ष में हो जाता है। अतः शोधकर्ताओं के विचार हैं कि 02 वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल फ़ोन नहीं चलाने देना चाहिए, अन्यथा उनमें नींद की कमी,भाषा विकास में व्यवधान,बोलने में देरी,अलग थलग रहने का व्यवहार, मोटापा, आटिज्म के लक्षण, ऑखों का दृष्टि विकास में बाधा आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। यह शोध लन्दन के शोधार्थियों द्वारा किया गया है और सरकार से अनुरोध किया गया है कि 05 वर्ष तक बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम पर नई गाइडलाइन जारी किया जाए।बच्चों को स्क्रीन एडिक्शन से बचाया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि छोटे बच्चों,यानि 18 माह तक के बच्चों को स्क्रीन, मोबाइल फ़ोन नहीं दिखाना चाहिए।02-12 वर्ष तक के बच्चों को एक दिन में 1 घंटे मोबाइल दे सकते हैं। टीनएजर्स 13-18 वर्ष को अधिकतम 1-2 घंटे और वयस्कों को मनोरंजन और सोशल मीडिया के लिए अधिकतम 2-3 घंटे मोबाइल फोन प्रयोग करने की सलाह देते हैं।हमारे यहाँ हज़ारों वर्ष पहले आदि योगी शिव ने विज्ञान भैरव तन्त्र में लिखा है कि”यन्त्र नहीं चेतना प्रधान होती है।अतःचेतना को पवित्र बनाना चाहिए।वैसे भी एक विचारक ने कहा है- ”Technology should serve people not control them.”तकनीक लोगों की सेवा के लिए है न की उन्हें कंट्रोल( नियंत्रण) के लिए।हमे मोबाइल का गुलाम नहीं होना चाहिए,बल्कि उसे अपने काम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।आज मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से लोगों में “नामोफ़ोबिया”नामक मानसिक बीमारी भी हो जाती है। कुछ लोगों में मोबाइल फ़ोन के बिना घबराहट होने लगती है।
वर्ष 2025 में AIIMS की स्टडी में पाया गया है कि 4 घंटे से ज़्यादा स्क्रीन देखने वाले 62%बच्चों की आँखे 14 साल की उम्र में ख़राब हो जाती हैं।
मोबाइल फ़ोन यदि 30 मिनट तक कान में चिपकाकर बात किया जाता है तो दिमाग़ का तापमान एक डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ जाता है।
रात 10 बजे के बाद मोबाइल फ़ोन का प्रयोग करने से 50%मेलोटोनिन हार्मोन की कमी हो जाती है।
एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि यदि 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चे नीली रोशनी वाले डिजिटल उपकरणों और छोटे टेक्स्ट मैसेज को बार बार देखते हैं तो उनमें 58%बच्चों को दृष्टि संबंधी समस्याएं होने की संभावना होती है।वर्ष 2025 में किए गए एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि मोबाइल फोन रिश्तों का क़ातिल भी है।लगभग 23%तलाक की वजह व्हाट्स एप और इंस्टाग्राम पर ज़्यादा समय बिताना बताया गया।
साथियों आप जो फ्री का ऐप अपने मोबाइल में चलाते हैं न वह भी कई कंपनियाँ 300-800/-में प्रति यूज़र डेटा बेच दे रहीं हैं।कारण आप का नाम,पता,आपकी रुचि,आप की गैलरी को बेचकर पैसे कमाए जा रहे हैं।वर्ष 2023 में भारत सरकार ने डेटा चोरी को रोकने के लिए Digital Personal Deta Protection Act लागू किया है कोई भी कम्पनी बिना आप के परमिशन से आप का डेटा नहीं चुरा सकती लेकिन हमे आप को मालूम ही नहीं और आप का डेटा चुराया जा रहा है वह ऐसे कि जब हम कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं तो सेटिंग में allow all बटन क्लिक कर देते हैं और वह सारा डेटा चला जाता है,और उसका उपयोग कंपनियाँ कर रही हैं मित्रों!आपके मोबाइल में फोटो खीचने मात्र से EXIF Deta में GPS location save हो जाता है और hacker जान जाता है कि आप कहाँ हैं;इसीलिए मोबाइल से साइबर क्राइम बढ़ गया है।National Crime Record Beauro ,2025 के एक आंकड़े के अनुसार प्रतिदिन OTP फ्रॉड से 1.2करोड़ रुपये की ठगी हो जाती है।आज कल डिजिटल अरेस्ट की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।फ़र्जी पुलिस वीडियो कॉल के माध्यम से डराकर,पैसे ट्रांसफर कराए जा रहे हैं,जब कि पुलिस व्हाट्स एप कॉल नहीं करती।
मोबाइल में 12-16 वर्ष के33%बच्चों को ऑन लाइन अनजाने में अश्लील मैसेज वीडियो मिलता है,जो बच्चों के व्यक्तित्व विकास में नकारात्मक प्रभाव डालता है।अतः बच्चों के माता पिता को ऐसे मोबाइल फ़ोन में Google Family Link App अवश्य लगा देना चाहिए।
आज मोबाइल फ़ोन आपातकाल में देवदूत बनकर सामने आया है।भूकम्प दुर्घटना में डायल112 से 7 मिनट में एम्बुलेंस आ जा रही है।आज घर बैठे लोग बैंक से पैसे का लेन देन कर रहे हैं।घर बैठे मरीज विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह प्राप्त कर रहा है और गाँव के स्कूल का बच्चा दीक्षा एप के ज़रिए NCERT की किताबें फ्री प्राप्त कर रहा है और तो और आज लखिमपुर खीरी का बच्चा मोबाइल से IIT के प्रोफेसर से पढ़ रहा है।आज मौसम की जानकारी घर बैठे मिल रही है सचेत और दामिनी ऐप द्वारा कहाँ आकाशीय बिजली गिरेगी की भी सूचना पहले प्राप्त करने में मदद मिली है। यह मोबाइल क्रांति से ही सम्भव हुआ है।बस हमें सचेत होकर इसका उपयोग करना चाहिए जिससे हम मोबाइल की ग़ुलामी से बच सकें।
लेखक: अवकाश प्राप्त प्रथम श्रेणी का अधिकारी,कई राज्य स्तरीय सम्मानों से विभूषित रचनाकार, साहित्यकार, वार्ताकार और शिक्षाविद हैं।